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जब भक्त पर संकट आता है तो भक्त की सहायता करने भगवान आते हैं-भागवताचार्य घनश्याम शास्त्री

11-Oct-21 26
Sandhyadesh

ग्वालियर - न्यू एकता कॉलोनी राजा गैस गोदाम गोल पहाड़िया लक्ष्मीगंज में रविवार से संगीतमय श्रीमद् भागवत कथा का आयोजन प्रारंभ हो गया है आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के आज सोमवार को दूसरे दिन ग्वालियर शहर के सुप्रसिद्ध भागवताचार्य पं.श्री घनश्याम शास्त्री जी महाराज ने कहा कि भगवान के कितने अवतार हैं ये सभी का प्रश्न  होता है, शास्त्री जी ने बताया कि जब जब भक्त पर संकट आता है तब तब भगवान अवतार लेते हैं अतः अवतार को गिनना Sandhyadeshअसम्भव है,बेसे देखा जाय तो भगवान के 24 अवतार का वर्णन आता है,और घंटे भी 24 ही होते हैं तातपर्य यह है कि हर घंटे भगबान अपने भक्त की रक्षा के लिए विद्धमान होते हैं  ईश्वर सत्य स्वरूप है,कल्याण का साधन एवं शास्त्रों का सार भक्ति है,भक्ति स्वतंत्र है और सभी गुणों की खान है नारद जी के प्रसंग में बताया कि उनके पिता नहीं थे और बचपन में ही उनकी माता ने संतों की सेवा के लिए छोड़ दिया जिनका नारद जी के जीवन पर इतना प्रभाव पड़ा कि बो ईश्वर की भक्ति में खो गये और आकाशवाणी हुई कि अगले जन्म में तुम्हारा जन्म ब्रह्मा जी के पुत्र के रूप में होगा सुखदेव जी के जन्म के वारे में बताया कि वर्षा का जल निर्मल होता है और जब गंदी नाली में गिरता है तब जल भी गंदा हो जाता है ठीक उसी प्रकार जव जीव मां के गर्भ में होता है तो निर्मल होता है बाहर आता है तब उसे माया अपने बंधन में जकड़ लेती है,सुखदेव जी ने अपनी माँ के पेट से तब ही जन्म लिया जब ईश्वर ने उनको ये आशीर्वाद दिया कि तुम्हारी भक्ति के ऊपर माया का प्रभाव कभी नही पड़ेगा इसके पश्चात उन्होंने अपने पिता वेदव्यास जी से भागवत कथा का उपदेश प्राप्त किया औऱ इसके पश्चात उनके ही माध्यम से जन जन तक भागवत कथा का प्रचार हुआ सुखदेवजी की कथा सुनकर ही राजा परीक्षित जी को मोक्ष की प्राप्ति हुई विदुर जी के प्रसंग को बताया कि बो इतने बड़े भक्त थे कि भगवान खुद उनके घर पर आय और उल्टे पटे पर बैठकर केले के छिलकों का भोग लगाया द्रौपती जी के बारे में व्याशजी ने बताया कि बो दया की प्रतिमूर्ति थी जिस अश्वस्थामा ने उनके पाँच पुत्रों की हत्या की उसी को माफ कर दिया आगे बताया जिसमे दया नही बो इंसान हो ही नही सकता,मनुष्य से गलती हो जाना बड़ी बात नहीं लेकिन ऐसा होने पर समय रहते सुधार और प्रायश्चित जरूरी है ऐसा नहीं हुआ तो गलती पाप की श्रेणी में आ जाती है कथावाचक पं.श्री घनश्याम शास्त्री जी महाराज ने बताया पांडवों के जीवन में होने वाली श्रीकृष्ण की कृपा को बड़े ही सुंदर ढंग से दर्शाया कहा कि परीक्षत कलियुग के प्रभाव के कारण ऋषि से श्रापित हो जाते हैं उसी के पश्चाताप में वह शुकदेव जी के पास जाते हैं भक्ति एक ऐसा उत्तम निवेश है,जो जीवन में परेशानियों का उत्तम समाधान देती है साथ ही जीवन के बाद मोक्ष भी सुनिश्चित करती है द्वापर युग में धर्मराज युधिष्ठिर ने सूर्यदेव की उपासना कर अक्षयपात्र की प्राप्ति किया हमारे पूर्वजों ने सदैव पृथ्वी का पूजन व रक्षण किया इसके बदले प्रकृति ने मानव का रक्षण किया भागवत के श्रोता के अंदर जिज्ञासा और श्रद्धा होनी चाहिए परमात्मा दिखाई नहीं देता है वह हर किसी में बसता है सुप्रसिद्ध कथावाचक पं.घनश्याम शास्त्री जी महाराज के मुखारविंद से श्रोताओं को कथा का रसपान कराया गया कथा में पारीछत रामेश्वर सिंह जादौन श्रीमती हेमलता जादौन ने सभी अतिथियों का स्वागत किया युवा भारतीय जनता युवा मोर्चा मण्डल अध्यक्ष अखिल राजोरिया जी,भाजपा मण्डल उपाध्यक्ष विपिन बिहारी गोयल जी ने भागवत भगवान जी की आरती उतारी

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