BREAKING!
  • साईं इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनी में वसंत कुंज योजना में बुक किए फ्लैट्स के हितग्राहियों ने की बैठक
  • पेट्रोल डीजल महंगाई से मचा है हाहाकारःयदुनाथ तोमर
  • ट्रिपल आईटीएम के संविदा कर्मी का घी चुराते वीडियो वायरल, मामला दर्ज
  • क्षत्रिय महासभा संयुक्त मोर्चा का संभागीय दशहरा मिलन समारोह 17 को
  • लोको पार्क में जले रावण, कुंभकरण व मेघनाथ के पुतले , भारी भीड उमडी
  • दादा का बडा धमाका , महाविजयी श्री राम की महाआरती 17 को
  • श्रीगंगदास जी की बड़ी शाला में धूमधाम से मनाई गई विजयादशमी
  • टूरिज्म प्लान ऐसा हो जिससे देश-विदेश के पर्यटन आकर्षित हों – केन्द्रीय मंत्री सिंधिया
  • केन्द्रीय मंत्री सिंधिया ने दीनदयाल रसोई वाहन को दिखाई हरी झण्डी
  • केन्द्रीय मंत्री सिंधिया ने ग्वालियर से वर्चुअल दिखाई हरी झण्डी

रागायन की सभा में सुरों से देवी की आराधना

10-Oct-21 24
Sandhyadesh

ग्वालियर। शहर की प्रतिष्ठित  सांगीतिक संस्था रागायन की मासिक संगीत सभा में आज सुरों से देवी की आराधना की गई। शारदेय नवरात्रि के उपलक्ष्य में आयोजित यह सभा ग्वालियर के जाने माने संगीत रसिक पंडित महीपत राव महाजनी जी की स्मृतियों को समर्पित थी। सभा में युवा गायक रोहन पंडित, प्रो पंडित सुनील पावगी और श्री अनंत महाजनी व श्री शरद बक्षी ने उन्हें स्वरांजलि अर्पित की।।Sandhyadesh

शुरू में रागायन के अध्यक्ष एवं श्रीगंगादास जी की बड़ी शाला के महंत स्वामी रामसेवकदास जी ने सरस्वती एवं गुरुपूजन किया। इसके पश्चात पंडित महीपत राव के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित की। इस अवसर पर रागायन के सचिव पंडित रामबाबू कटारे ,पंडित राम उमड़ेकर विशेष रूप से उपस्थित थे।
सभा का आगाज़ ग्वालियर के युवा गायक रोहन पंडित के गायन से हुआ। उन्होंने राग केदार से गायन की शुरुआत की। इस राग में उन्होंने तीन बंदिशें पेश की। तिलवाड़ा में निबद्ध विलंबित बंदिश के बोल थे -" बन ठन के" जबकि तीन ताल में मध्य लय की बंदिश के बोल थे-"कंगनवा मोरा" ।आपने तीनताल में ही द्रुत बंदिश पेश की- कान्हा रे नंद नंदन"। रोहन ने तीनों ही बंदिशें बड़े सलीके से पेश की। उनके गायन में घराने की खुशबू बखूबी महसूस की जा सकती है। राग तिलंग में अद्धा तीन ताल की ठुमरी -" सजन तुम काहे को नेहा लगाए" गाकर उन्होंने महफ़िल को रंजक बना दिया। इसी राग में तराने की प्रस्तुति भी लाजवाब रही। आपके साथ तबले पर मनोज मिश्रा एवं हारमोनियम पर नारायण काटे ने सधी हुई संगत की।Sandhyadesh

दूसरी प्रस्तुति में देश के जाने माने हवाईन गिटार वादक प्रो पंडित सुनील पावगी का सुमधुर गिटार वादन हुआ। गिटार को शास्त्रीय संगीत की शिक्षा में लाने का श्रेय पंडित पावगी को जाता है ।बहरहाल , आपने अपने वादन के लिए राग झिंझोटी का चयन किया। आलाप जोड़ झाला से शुरू करके आपने इस राग में तीन ताल में दो गतें पेश की। पंडित पावगी जी का वादन अद्भुत है, गायकी अंग की प्रचुरता और चैनदारी उनके वादन में मिसरी सी घोलती है। झिंझोटी की गतें बजाने में रागदारी की बारीकियों के साथ गायकी की बारीकियों को सुनकर रसिक मुग्ध हो गए। वादन का समापन आपने मिश्र शिवरंजिनी में धुन से किया। आपके साथ टेबल पर श्री विकास विपट ने बेहतरीन संगत का प्रदर्शन किया।

सभा का समापन श्री अनंत महाजनी एवं शरद बक्षी की ख़याल जुगलबंदी से हुआ। आपने राग पूरिया से गायन की शुरुआत की। संक्षिप्त आलाप के साथ आपने इस राग में दो बंदिशें पेश की। एक ताल में निबद्ध विलंबित बंदिश के बोल थे - फूलन के हरवा, जबकि तीन ताल में निबद्ध बंदिश के के बोल थे- उन बिन कल न परत"। दोनों ही बंदिशों को गाने में आपने खूब रंग भरे। राग की बढ़त करने में सुर खिलते गए। फिर तानों की अदायगी भी शानदार रही। राग नंद से गायन को आगे बढ़ाते हुए आपने तीन ताल में बंदिश पेश की- रुन झुन बाजे ललन पैजनिया। गायन का समापन आपने भैरवी में भजन " जो भजे हरि को सदा "से किया।  आपके साथ तबले पर डॉ मुकेश सक्सेना एवं हारमोनियम पर प महेशदत्त पांडेय ने मणिकांचन संगत का प्रदर्शन किया।

Popular Posts