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Sandhyadesh

ताका-झांकी

महानगर के अधिकांश पार्क लापरवाह अधिकारियोंं के चलते दुर्दशा के शिकार

15-Apr-21 181
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अजय मिश्रा 
ग्वालियर। ग्वालियर नगर निगम का एक बडा अमला महानगर के पार्कों को सुंदर बनाने में जुटता है लेकिन निगम के पार्क अधिकारी की लापरवाही के चलते महानगर के अधिकांश पार्क दुर्दशा का शिकार होते जा रहे हैं। यहां पदस्थ मालियों का पता नहीं हैं और वह कब अपने काम पर आते हैं और कब जाते हैं इसका हिसाब रखने वाला कोई नहीं है। निगमायुक्त महानगर को स्वच्छ और सुंदर बनाकर पहले स्थान पर लाने के भरसक प्रयास कर रहे हैं , लेकिन लापरवाह अधिकारियों के चलते उनके प्रयासों पर पानी फिर रहा है। Sandhyadesh
प्राप्त जानकारी के अनुसार महानगर में अनेक पार्क हैं जिनपर वाकायदा मालियों को नियुक्त किया गया है। इतना ही नहीं इनका वेतन भी काम करने के बाद ही मिलता है, लेकिन विस्वस्त सूत्र बताते हैं कि निगम में पदस्थ माली पार्कों में कम और निजी काम ज्यादा करते हैं। वह लोगों के यहां निजी काम करने का अलग से पैसा लेकर निगम को चूना लगा रहे हैं और निगम से मिलने वाला वेतन सीधा अपनी बैंक में जमा करते हैं। सूत्र बताते हैं कि इसके लिये मालियों द्वारा पार्क अधिकारी तथा उनकी मानीटरिंग करने वालों को एक निश्चित रकम प्रतिमाह अदा की जाती है इसके बाद ही पार्क अधिकारी उक्त माली का वेतन बनाकर निगम की राजस्व शाखा में भेजते हैं और उसका पैसा उन्हें मिलता है। 
विभागीय सूत्र बताते हैं कि निगम के पार्क में एक बडा घोटाला है , सूत्र यह भी बताते हैं कि हार्टीकल्चर के नाम पर निगम मेें भर्ती हुये मुकेश बंसल द्वारा अनेक घोटाले किये जिसकी शिकायत के बाद वह निलंबित भी हुये लेकिन अपनी पहुंच और चांदी के जूते के बल पर फिर से पार्क का प्रभार उन्हें दे दिया गया। जबकि उक्त मामलों की जाचें अभी भी चल रहीं हैं। 
सूत्र बताते हैं कि जब पूर्व निगमायुक्त अनय द्विवेदी ने मुकेश बंसल की कारगुजारियों की जानकारी के बाद सभी मालियों की फिजीकल गिनती कराने की ठानी तो उन्होंने उच्च न्यायालय के अधिकारियों के यहां कई मालियों की बात कहकर उन्हें भी गुमराह किया , जबकि विभागीय सूत्र बताते हैं कि पार्क अधिकारी कई मालियों का फर्जी वेतन वाउचर बनाकर वेतन का हेर फेर कर रहे हैं। 
उधर एक नागरिक हेमंत शमा्र्र ने जडेरूआ बांध के पास स्थित पार्क को ठीक करने की शिकायत की । नागरिक हेमंत शर्मा ने कहा कि वह सुबह जब पार्क में घूमने जाते हैं तो वहां पर लंबी लंबी गाजर घास जमी है इतना ही नहीं पूरे पार्क की स्थिति बदतर है। वहां पर पदस्थ माली का पता किया तो उन्हें पता चला कि वहां नाम का माली पदस्थ तो है लेकिन वह कब आता है कब जाता है उसकी जानकारी पार्षद तक को नहीं है। ऐसा ही निगम के कई कालोंनियों में बने पार्को की स्थिति है। कई जगह एक ही माली को दो दो पार्को का काम दे दिया है। वह एक स्थान पर मुआयना करने पर दूसरे पार्क की बात कहकर निजी कामों में व्यस्त रहता है। विभागीय सूत्र बताते हैं कि पार्क अधिकारी के संरक्षण में निगम के माली फल फूल रहे हैं। वह स्वयं विभिन्न मामलों में फंसे हैं इससे किसी से कुछ कह भी नहीं पाते हैं। अब देखना है कि पार्क अधिकारी के संरक्षण में क्या महानगर के पार्क सुंदर बनेेंगे इसका इंतजार रहेगा। नहीं तो गर्मी के मौसम में पूरे पार्क की हालत और बदतर होगी और निगमायुक्त कुछ व्यवस्था करें । 

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