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ताका-झांकी

प्रशासन इलेक्शन मोड पर , भाजपा-कांग्रेस में गर्माहट नगरीय निकाय चुनाव

08-Mar-21 378
Sandhyadesh

रंजना शर्मा
ग्वालियर। नगरीय निकाय चुनावों का एलान कभी भी हो सकता है। प्रदेश के मुख्य निर्वाचन अधिकारी बीपी सिंह ने कलेक्टरों को इलेक्शन मोड पर तैयार रहने के निर्देश दिये हैं। चुनाव की सरगर्मियों में उबाल जब आया तब भाजपा प्रदेश अध्यक्ष बीडी शर्मा का बयान आया कि नगरीय निकाय चुनाव में उम्र का बंधन नहीं रहेगा और विधायक या पूर्व विधायक भी चुनाव लड़ सकते हैं। इस बयान से भाजपा और मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस में चुनावी समीकरणों में उथल-पुथल मच गई है।
बात करें ग्वालियर नगर निगम की तो महापौर पद सामान्य वर्ग की महिला के लिये आरक्षित हुआ है। सामान्य वर्ग की महिला सीट होने के साथ ही भाजपा -कांग्रेस में दावेदारों की सक्रियता बढ गई है और दोनों पार्टी के कददावर नेता अपने-अपने समर्थकों को टिकट दिलाने की कवायद में हुई है, मगर दोनों दलों में मुरीद राजनीति में कैकडा संस्कृति हावी है। सांध्यदेश डॉट कॉम की एक पडताल से कुछ नाम भाजपा के प्याले से छनकर आए हैं। इसमें श्रीमती सुमन शर्मा, श्रीमती वीरा लोहिया, श्रीमती मीना चौधरी और श्रीमती हेमलता रामेश्वर भदौरिया के नाम शामिल हैं। इन नामों पर अगर माइनस और प्लस किसके खाते में क्या है। पहले बात करें श्रीमती सुमन शर्मा की तो यह भाजपा की जमीनी कार्यकर्ता हैं और कई पदों पर रहकर जिम्मेदारियों का निर्वहन किया है, तथा कार्यकर्ताओं की यह पहली पसंद हैं यही इनका प्लस प्वांइट है, जहां तक माइनस प्वांइट की बात करें तो यह शून्य ही कहा जायेगा। साथ ही पारिवारिक पृष्ठ भूमि राजनैतिक है और सबको साथ लेकर चलती हैं। अब बात करें श्रीमती डॉ. वीरा लोहिया की यह पेशे से डाक्टर हैं और एक बार पार्षद रह चुकी हैं। यही इनका प्लस प्वांइट है। और मानस प्वांइट यह है कि भाजपा के कार्यक्रमों में कहीं नजर नहीं आती हैं। भाजपा नेत्री श्रीमती मीना चौधरी भी पार्षद रह चुकी हैं। पार्टी कार्यक्रमों में यदा कदा ही नजर आतीं हैं। इनके पति अभय चौधरी का भाजपा के कददावर नेताओं से सीधा संपर्क है , यही इनका प्लस प्वांइट है और माइनस प्वांइट से इनकी सारी राजनीति पति के ऊपर निर्भर हैं। एक और दावेदार श्रीमती हेमलता रामेश्वर भदौरिया का संपर्क सीधा सांसद विवेक नारायण शेजवलकर से है। यही इनका प्लस प्वांइट हैं और पति रामेश्वर भदौरिया का इनकी राजनीति में दखल ही माइनस प्वाइंट है। 
इन सबके बीच अगर भाजपा पिछडे वर्ग की महिलाओं को टिकट देने पर कोई निर्णय लेती है , हालांकि ऐसा निर्णय भाजपा के लिये आत्मघाती कदम भी हो सकता है। इस वर्ग से पूर्व मंत्री श्रीमती माया सिंह, जो निगम में उप सभापति राज्यसभा सांसद, विधायक व मंत्री के साथ कई पदों पर रह चुकी हैं। राज्यसभा सांसद श्री ज्योतिरादित्य सिंधिया का इनका साथ मिलने के पूरे आसार हैं। वहीं पूर्व महापौर समीक्षा गुप्ता की सक्रियता और अपने महापौर कार्यकाल में किये गये कार्यों को लेकर मजबूती से दावा कर रहीं हैं। टिकट पाने का मगर भाजपा उम्मीदवार पूर्व मंत्री नारायण सिंह कुशवाह के खिलाफ भाजपा छोडकर निर्दलीय चुनाव लडी और नारायण सिंह चुनाव हार गये और श्रीमती समीक्षा गुप्ता को पार्टी से बाहर का रास्ता दिखाया गया, मगर अब उनकी पार्टी में वापसी हो चुकी है । इनकी राजनीति को कमजोर करने में इनके पति राजीव गुप्ता का काम काज में ज्यादा दखल देना माना जा रहा है। 
चुनाव कब होंगे कयास जारी
चुनाव की आहट से राजनैतिक दलों में गर्मीहट है, मगर पांच राज्यों खासकर पश्चिम बंगाल में चुनाव है। इस कारण भाजपा के उच्च पदस्थ सूत्रों का कहना है कि अप्रैल में चुनाव संभव नहीं है, वहीं प्रशासनिक अमला इलेक्शन मोड पर है। देखना है कि चुनाव का एलान कब होता है, निगाहें सभी की लगी हुई हैं।    

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