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Sandhyadesh

ताका-झांकी

उपभोक्ता के अधिकारों का संरक्षण करता है उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम- डॉ वी. के. श्रोत्रीय

02-Aug-20 51
Sandhyadesh

मध्य भारत शिक्षा समिति द्वारा संचालित माधव विधि महाविद्यालय में आयोजित दो दिवसीय वेबीनार के प्रथम दिन महारानी लक्ष्मीबाई महाविद्यालय के विधि के पूर्व विभागाध्यक्ष डॉ विनोद कुमार श्रोत्रीय ने वेबीनार के दौरान विषय पर प्रकाश डालते हुए अपने कथन में कहा  कि माननीय सुप्रीम कोर्ट के दखल के बाद ही भारत वर्ष में उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम लागू किया गया। इस अधिनियम ने उपभोक्ताओं के अधिकारों के संरक्षण में क्रांतिकारी परिवर्तन हुए।
अधिनियम के अंदर उपभोक्ता के अधिकारों को सुरक्षित करने के लिए कॉन्सिल बनाई गई उपभोक्ता अधिकारों की जानकारी उपभोक्ता को होना आवश्यक है और इसके लिए उपभोक्ता संरक्षण शिक्षा का होना भी आवश्यक है और यह कार्य विधि के विद्यार्थी बेहतर तरीके से कर सकते हैं।
मानव अधिकारों के संरक्षण के उद्देश्य से ही उपभोक्ता अधिकारों के संरक्षण का कार्य किया गया है। हम सभी मानव परिवार के सदस्य हैं और हम सब के कुछ उद्देश्य है।और हमें अपने उद्देश्य की पूर्ति के लिए वे समस्त अधिकार मिलने चाहिए जो हमारे लिए आवश्यक है।
उपभोक्ता संरक्षण का कानून वास्तव में एक ऐसा कानून है जो हमें अधिकार देता है की जो हम चाहते हैं वह हमें मिले। जिसका मूल्य हम चुका रहे हैं वह हमें सही-सही प्राप्त हो। उन्होंने अपने व्याख्यान में आगे कहा कि ई कोर्सेस संतुलित करने के लिए भी एक नए उपभोक्ता संरक्षण कानून की आवश्यकता थी इसलिए उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम 1986 को रिपील कर उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम 2019 पारित किया गया है।
वेबीनार में स्वागत भाषण शासी निकाय सदस्य एडवोकेट  ब्रजमोहन श्रीवास्तव  द्वारा दिया गया। अतिथि परिचय प्राचार्य डॉ नीति पांडेय ने दिया।  वेबीनार का संचालन प्रोफेसर  गिरीश पाल ने किया एवं आभार प्रदर्शन शासी निकाय अध्यक्ष एडवोकेट  प्रवीण नेवासकर  द्वारा किया गया। वेबीनार में समस्त महाविद्यालय परिवार एवं विधि विद्यार्थी उपस्थित रहे।

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