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Sandhyadesh

आज की खबर

मजबूत युवा भारत के आगे घुटने टेकता कोरोना. कमजोर कोरोना के तेज फैलाव से डरने की जरुरत नहीं

02-Jun-20 42
Sandhyadesh

( मनोज कुमार द्विवेदी, अनूपपुर , म प्र)
अनूपपुर / दुनिया के अन्य देशों की तुलना मे मजबूत युवा भारत के आगे कोरोना ने लगभग घुटने टेक दिये हैं। लाकडाऊन के 60 दिन बाद ढील मिलते ही भले ही कोरोना संक्रमितों की संख्या तेजी से बढ रही हो ,  लेकिन यह युवाओं के लिये ( 50 वर्ष से कम उम्र के लिये) प्राणघातक तो नहीं ही लग रहा है। इस बीमारी से लोग अधिक तेजी से स्वस्थ हो रहे हैं। कुछ ऐसे भी विशेषज्ञ हैं जो कोरोना प्रभावित युवाओं में इम्यून सिस्टम अधिक मजबूत हो जाने का दावा कर रहे हैं। इसलिये अब यह माना जाने लगा है कि अधिक पाजिटिव केस कोरोना की मृत्यु के बाद उसके शरीर के आर एन ए के संपर्क में आने से सामने आ रहा है। जिसमें बीमारी के कोई लक्षण ना होने के कारण बहुतायत में लोग स्वत: अपने आप बिना किसी विशेष इलाज के ठीक हो रहे हैं। 
जून महीने में भारत,  कोरोना पर भारी पडता दिख रहा है। 2 जून को भारत में कोरोना पाजिटिव की संख्या 1 लाख 97 हजार को छू  रही है , तो वहीं कोरोना से स्वस्थ होने वालों की संख्या भी 95 हजार से ऊपर है । 
24 घंटे में प्रभावितों की संख्या प्रतिदिन बढती जा रही है इसलिये कुछ लोग इसे लेकर चिंतित हैं । लेकिन दुनिया के तमाम विकसित- विकासशील देशों की तुलना मे भारत मे कोरोना से ठीक होने वालों की संख्या 48% से अधिक है। म प्र में 60% से अधिक लोग कोरोना से ठीक होकर स्वस्थ हो चुके हैं। दूसरा , भारत में कोरोना से मरने वालों की संख्या अत्यंत नगण्य है। यह 2.7% के आसपास है। जिसके पीछे अधिक उम्र , अन्य बीमारियों, किडनी- फेफडे- हृदय या अन्य महत्वपूर्ण अंगों की बीमारी के साथ शरीर के कमजोर प्रतिरक्षा तंत्र का होना भी महत्वपूर्ण कारण रहा है। जबकि गैर कोरोना काल में इससे अधिक लोग प्रतिदिन सडक दुर्घटना या अन्य बीमारी- वजहों से मरते रहे हैं। कोरोना के सामुदायिक संक्रमण के दॊर में कम मृत्यु तथा रिकव्हरी दर अधिक होना भारत के लिये शुभ संकेत माना जा रहा है।
कमजोर कोरोना- तेज प्रसार
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देश के तमाम विषय विशेषज्ञों का मानना है कि भारत में   लाकडाऊन के बीच मरकजी जमातियों तथा श्रमिकों की घर वापसी से कोरोना का फैलाव मई  के महीने में अधिक हुआ है। यह संख्या जून - जुलाई से दिसम्बर तक अधिक तेजी से बढ सकती है। कुछ स्थानों पर यह सामुदायिक फैलाव की शक्ल ले चुका है। लेकिन देश का अधिकांश हिस्सा जून के प्रारंभिक सप्ताह तक सामुदायिक संक्रमण से बचा हुआ है। भले ही एक दिन में कोरोना पाजिटिव्स की संख्या 8 हजार को पार कर गयी है लेकिन उसी अनुपात में मृत्यु दर ना बढना तथा कोरोना को हरा कर ठीक होने वालों की संख्या में भी उसी गति से इजाफा हुआ है। उम्मीद की जा रही है कि हमारे देश में रिकव्हरी दर आने वाले समय मे अधिक तेजी से बढेगी। जून - जुलाई में कमजोर कोरोना का तेजी से प्रसार तो होगा लेकिन लोगों के जीवन को इससे खतरा बिल्कुल भी नहीं है। सामान्य उपचार तथा अच्छे रखरखाव से ही लोग स्वस्थ होकर घर वापस जा रहे हैं। म प्र के अनूपपुर जैसे छोटे जनजातीय जिले के जिला अस्पताल में बने आइसोलेशन सेंटर में तीन कोरोना मरीजों को रखा गया ,जिन्हे तय मानकों के हिसाब से दवाएं दी गयीं। अब वे तीनों स्वस्थ हो कर घर जा चुके हैं। इससे अनूपपुर का जिला प्रशासन , चिकित्सालय के लोग आत्मविश्वास से भरे हुए हैं। दो दिन में 15 मरीज नये आने के बावजूद कलेक्टर चन्द्रमोहन ठाकुर ने लोगों से बिल्कुल भयभीत ना होने लेकिन   सावधान रहने की अपील की है।

भारत में मरणासन्न है कोरोना
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    भय का भूत है कोरोना
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भारत में कोरोना का संक्रमण तेज होने के बावजूद यह जानलेवा नहीं है। कोरोना की आक्रामकता फरवरी- मार्च की तुलना में बहुत कम हुई है। जबकि विभिन्न राज्यों ने जिला - ब्लाक स्तर पर इलाज की पुख्ता व्यवस्था कर रखी है। यह व्यवस्था कितनी व्यापक है इसका इसी से अंदाज लगाया जा सकता है कि सभी जिला चिकित्सालयों ने अपने अधीनस्थ अन्य चिकित्सालयों के साथ 40-50 प्रतिशत संक्रमण फैलने की स्थिति या इससे अधिक लोगों के इलाज के लिये आवश्यक दवाएं, आइसोलेशन सेंटर, पीपीई, मास्क, सेनेटाइजर, आक्सीजन, वेंटिलेटर आदि की व्यवस्था कर रखी है। कोरोना की जांच अधिकांश स्थानों पर संभाग स्तर पर होने से 24 घंटे या थोडा कम - ज्यादा समय में रिपोर्ट मिल जाती है।‌ कोरोना के कमजोर पडने , जांच- चिकित्सा की व्यवस्था बेहतर हो जाने से आम जनता को अब बचाव के सारे नियम कायदे मानकर प्रशासन  को सिर्फ सहयोग ही करना है।

बचाव ही उपचार है
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दुनिया मे कोरोना का वैक्सीन बनने में समय लगेगा। इसकी दवाईयां भी अभी तक बनाई नहीं जा सकी हैं। लक्षण के आधार पर देशों में मरीजों  का इलाज किया जा रहा है। भारत में इलाज के अलग अलग तरीके अपना कर लोगों को स्वस्थ किया जा रहा है। ऐसी स्थिति में आम जनता से सोशल डिस्टेशिंग बनाए रख कर , मास्क लगाए रखने, बार बार हाथ- चेहरा साबुन से धोते रहने   या जरुरी होने पर पूरा स्नान करने, बाहर आने - जाने पर हर बिन्दु पर सावधान रहने ,सेनेटाइजर का प्रयोग करते रहने की अपील की जा रही है। दूरी , मास्क , साबुन हमारे जीवन का अभिन्न अंग बन गये हैं। सावधानी को बचाव का मूल मंत्र मानकर जीवन रक्षा की जा सकेगी। बुजुर्ग, बीमार, गर्भवती तथा छोटे बच्चों को भीड तथा संक्रमण के खतरों से बहुत ...बहुत...बहुत बचाए रखना होगा। 

स्वस्थ जीवन शैली मतलब कोरोना का दुश्मन
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 जबलपुर के ख्यातिलब्ध डा जितेन्द्र जामदार का कहना है कि कोरोना संक्रमण केवल कमजोर लोगों को डरवा सकता है, लापरवाही अधिक होने पर प्राणघातक भी हो सकता है। कमजोर का आशय यहाँ अधिक उम्र, कमजोर शरीर, कमजोर रोग प्रतिरोधक क्षमता से है। लेकिन मजबूत रोग प्रतिरोधक क्षमता तथा मजबूत जवान शरीर का कोरोना कुछ नहीं बिगाड सकती । इसलिए भारत में कोरोना से डरने की कोई जरुरत नहीं है।
लेकिन इसका मतलब यह भी नहीं कि हम कोरोना को लेकर लापरवाह हो जाएं‌। किसी भी तरह की लापरवाही प्राणघातक हो सकती है। कोरोना को हराने के लिये प्रत्येक व्यक्ति को अपनी रोगप्रतिरोधक क्षमता बढानी तथा बनाए रखनी होगी। इसके लिये नियमित व्यायाम, योग, प्राणायाम, अनुलोम- विलोम, सूर्य नमस्कार सहित अन्य खेल ,दॊड आदि को जीवन का नियमित हिस्सा बनाना होगा। हल्दी, दूध, आंवला, गुरिच या गिलोय, तुलसी, गर्म पानी , काली मिर्च, पीपर आदि का समयबद्ध प्रयोग करना होगा। ठंडे पेय , खाद्य पदार्थों से परहेज करते हुए नीबू, शहद ,अदरक आदि का अधिक सेवन करना होगा। मजबूत तन - मन का कोरोना कुछ नहीं बिगाड सकता इसलिये आध्यात्मिक , मानसिक ,शारीरिक स्वस्थ रहने का मंत्र हमारे जीवन का अभिन्न अंग बनाना होगा।

2020-07-12aaj