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ताका-झांकी

रागायन की मासिक संगीत सभा, सर्द मौसम में सुरों की गर्माहट

27-Nov-22 73
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ग्वालियर। शहर की प्रतिष्ठित सांगीतिक संस्था रागायन की मासिक संगीत सभा युवा कलाकारों के नाम रही। सिद्धपीठ श्री गंगादास जी की बड़ी शाला में रविवार की शाम सर्द मौसम में सजी सुर साज की इस महफिल में सुरों का ऐसा रंग जमा कि सर्दी का अहसास जाता रहा,और माहौल में गर्माहट तारी हो गई। आज की यह सभा इसलिए खास रहीं कि यह शाला के सत्रहवें महंत श्री रामेश्वरदास जी की स्मृतियों को समर्पित रही। उनके पुण्य स्मरण पर रामायण का सांगीतिक पारायण भी किया गया।

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शुरू में रागायन के अध्यक्ष एवम शाला के पीठाधीश्वर स्वामी रामसेवकदास जी ने मां सरस्वती की प्रतिमा के समक्ष दीप प्रज्ज्वलित कर एवम गुरु पूजन कर कार्यक्रम शुभारंभ किया। 
सभा की पहली प्रस्तुति में मुरैना से आए पंडित सुभाष देशपांडे के सुयोग्य शिष्य सुजल जैन का सुमधुर गायन हुआ। सुजल ने राग पुरिया कल्याण में गायन प्रस्तुत किया। एकताल में निबद्ध विलंबित बंदिश के बोल थे -" होबन लागी सांझ" जबकि तीन ताल में मध्यलय की बंदिश के बोल थे -" लाखों में एक है" । सुजल ने दोनो ही बंदिशों को बड़े सलीके से गाया। गायन का समापन उन्होंने भजन - रघुवर तुमको मेरी लाज" से किया। सुजल के साथ तबले पर मनोज शर्मा, एवम हारमोनियम पर संजय देवले ने संगत की।
सभा की दूसरी प्रस्तुति में ग्वालियर के वरिष्ठ कलाकार श्री जगतनारायणं शर्मा का एकल पखावज वादन हुआ। आपने चौताल में वादन की प्रस्तुति दी। उन्होंने विविधतापूर्ण लय कारियों के साथ कुछ परनें तिहाइयां आदि ओजपूर्ण ढंग से पेश किए। आपके साथ श्री मनीष शर्मा ने हारमोनियम पर नगमा दिया।
सभा का समापन युवा गायक प्रज्वल शिर्के के खयाल गायन से हुआ। प्रज्वल ने अपने गायन के लिए राग यमन का चयन किया। झुमरा में निबद्ध विलंबित बंदिश -" ऐरी लाल मिले" को सलीके से पेश करते हुए उन्होंने सिलसिलेवार राग की बढ़त की और तीनताल मध्यलय की बंदिश -" ननदी के वचनवा" को बड़े ही सहज ढंग से पेश किया। इसके बाद तीनताल द्रुत लय में तराने की पेशकश भी शानदार रही। प्रज्वल के साथ तबले पर उनके पिता लोकेंद्र शिर्के और हारमोनियम पर शशांक शिवहरे ने संगत की।
रामायण पाठ का समापन
महंत श्री रामेश्वरदास जी की पुण्य स्मृति में शाला में गत 25 नवंबर से आयोजित तीन दिवसीय रामायण पाठ का आज समापन हो गया। इस अवसर पर बोलते हुए सेवानिवृत डी आई जी श्री योगेन्द्र कुमार पचौरी ने कहा कि रामायण पाठ सभी शहीद संतों वी शाला के दिवंगत संतों की पुण्य स्मृति में आयोजित किया गया। आने वाली पीढ़ियां यह परंपरा बरकरार रखें और भगवान राम की भक्ति से जुड़कर दानपुण्य के काम करें यही हम सबकी कामना है। इस अवसर पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु, और संगीत रसिक उपस्थित रहे।

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