BREAKING!
  • फिल्मी स्टाइल में दिनदहाड़े डबरा में हुई सनसनीखेज लूट की घटना का पर्दाफाश, 4 आरोपी गिरफ्तार
  • महाविद्यालयों के प्राचार्य समय पर आये, कॉलेजों में साफ-सफाई रहे: कमिश्नर
  • मुख्यमंत्री जी की घोषणाओं में लगातार प्रपोजल बनते चले जायें: कमिश्नर सिंह
  • सुरताल में वायलिन से सुनाई राजस्थानी लोकवाद्य रावणहत्था की धुन
  • उद्यानिकी मंत्री कुशवाह ने ग्राम बंधौली में किया नल जल योजना का लोकार्पण
  • योजनाओं की जमीनी हकीकत जानने कलेक्टर पहुँचे ग्राम सहसारी, चौपाल लगाकर की ग्रामीणों से चर्चा
  • जल जीवन मिशन में 55 लाख ग्रामीण परिवार हुए लाभान्वित, सर्टिफाइड ग्रामों की संख्या में मध्यप्रदेश अव्वल
  • शहर कांग्रेस अध्यक्ष देवेन्द्र शर्मा भारत जोड़ो यात्रा में हुये शामिल, राहुल गांधी से की मुलाकात
  • राहुल गांधी से कांग्रेस विधायक डाॅ. सिकरवार ने की मुलाकात
  • उद्योग और व्यापार के उन्नयन के लिये फेडरेशन ऑफ म.प्र.चेम्बर ऑफ कॉमर्स एण्ड इण्डस्ट्री सहयोगी की भूमिका में रहेगा: भूपेन्द्र जैन

Sandhyadesh

ताका-झांकी

नजरिया आपका नजरिया हमारा एक होना चाहिए, नहीं किसी से गिला शिकवा शिकायत करना चाहिए।

24-Nov-22 33
Sandhyadesh

ग्वालियरा।  स्वर धारा साहित्यिक संस्था की काव्य गोष्ठी वरिष्ठ शायर विजय सेठी अकेला के निवास पर  रमेश वियोगी की अध्यक्षता में आयोजित हुई जिसमें रामबरन ओझा मुख्य अतिथि एवं बेलन ग्वालियरी विशिष्ट अतिथि रहे। गोष्ठी का संचालन ज्योति दोहरे दिनकर द्वारा किया गया।
देखा तुमने जहां था हमें प्यार से
छोड़ आए हैं खुद को उसी मोड़ पर
            माला श्रीवास्तव
एहसास खत्म हुए सारे बस एहसान रह गये।
रिश्ते भीड़ में चेहरों की पहचान रह गये 
            सीता चोहान पवन
झूठ तो खुद से ही छा जाता है
है कठिन सच को रुबरु करना।
          प्रतिपाल सिंह

नजरिया आपका नजरिया हमारा एक होना चाहिए नहीं किसी से गिला शिकवा शिकायत होना चाहिए।
नयन किशोर श्रीवास्तव
उथल पुथल भरे जीवन में,
शान्त चित्त रह जो मुस्काता।
          दीप ज्योति दीप
जीवन है सारा त्राहि त्राहि
बीत रहा संताप लिए।
कोई भूखा मरता कोई जीता भारी पाप लिए 
           ज्योति दोहरे
चक्रवृद्धि सा जीवन अपना,
बीज गणित से सपने,
गिनती और पहाड़े सब कुछ
याद किए हैं हमने।
           रामबरन ओझा
जब से तेरा दर्द हृदय का मीत हो गया 
नयनों से छलका हर आंसू गीत हो गया।
              देवेन्द्र राही
बदराया सा मौसम है और मन की ये आस है।
          डॉ यश उद्गम
पानी पे चल सको तो मेरे साथ चलो,
दुनिया बदल सको तो मेरे साथ चलो।
             रमेश वियोगी
जंग जीवन में न जब तक तुम लड़ोगे,
ऊंचाइयों का ये शिखर कैसे चढ़ोगे।
             बेलन ग्वालियरी
खताओं की मेरी सजा दे रहे हैं,
वो लम्बी उमर की दुआ दे रहे हैं।
       विजय सेठी अकेला
जब भी दुश्मन करीब लगता है।
यार कितना अजीब लगता है।
        अनुराग श्रीवास्तव

गोष्ठी के उपरांत श्रीमती रन्जना सेठी द्वारा आभार व्यक्त किया गया।

Popular Posts