पॉलिटिकल माइलेज’ लेने की जल्दबाजी में क्यों रहते है भाजपा प्रदेश अध्यक्ष?

2017-12-12 09:45:35 143
Sandhya Desh


मप्र के भाजपा अध्यक्ष नंदकुमार सिंह चौहान अपने बयान को लेकर एक बार फिर खबरों में हैं। वे प्रसन्न हैं कि मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की पहल पर मप्र पहला ऐसा राज्य बना है जिसने 12 वर्ष से कम उम्र की बच्ची के साथ दुष्कृत्य करने वाले को फांसी देने का कानून विधानसभा से पास किया है। गदगद नंदकुमार चाहते हैं कि 14 दिसंबर को महिलाएं जब इस कार्य के लिए मुख्यमंत्री का अभिनंदन करें तो पार्टी कार्यकर्ता इसका राजनीतिक लाभ उठाएं। अच्छे कार्य के लिए अपने नेता का सम्मान करना अच्छी बात है, लेकिन हर काम का ‘पॉलिटिकल माइलेज’ लेने की मंशा सवाल उपजाती है।
भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष चौहान न केवल प्रदेश के मुखिया ही हैं बल्कि सांसद भी हैं। वे अच्छे वक्ता हैं और अनौपचारिक चर्चाओं में अकसर ही फरमाइश कर उनसे शायरी सुनी जाती है। यानि उन्हें भाषा की अच्छी समझ है और वे जानते हैं कि शब्दों का क्या महत्व होता है तथा कहां, कैसा शब्द उपयोग करना चाहिए। अच्छा वक्ता यदि बार-बार कोई चूक करे तो लगता है कि कुछ बात है जो अनुकूल नहीं है। ताजा मामला महिला समूहों द्वारा किए जा रहे मुख्यमंत्री के सम्मान समारोह में भीड़ जुटाने के लिए आयोजित भाजपा की बड़ी बैठक का है। यहां प्रदेश अध्यक्ष चौहान ने कई बातें कीं। कहा कि ऐसा नहीं है कि अच्छा काम कर हिमालय पर चले जाएं। हम राजनीतिक लोग हैं। हर अच्छे निर्णय का पॉलिटिकल माइलेज लेंगे ताकि हमारी सरकार आगे भी बनी रहे। इस दृष्टि से चौहान का कहना सही हो सकता है मगर हर कार्य का राजनीतिक लाभ कैसे उठाना है उस पर तो विचार करना होगा।
मुद्दे की बात यह है कि नेशनल क्राइम रिकार्ड ब्यूरो की ताजा रिपोर्ट में भी मप्र में बलात्कार की दर देश में सर्वाधिक बताई गई है। रिपोर्ट के खुलासे के बाद 14 सालों से सत्ता में बैठी भाजपा तथा उसकी सरकार पर सवाल उठे। इसी बीच मप्र विधानसभा ने 12 वर्ष से कम उम्र की बच्ची के साथ दुष्कर्म पर फांसी की सजा के प्रावधान वाला विधेयक पारित कर दिया। नंदकुमार चौहान चाहते हैं कि बलात्कार पर जितनी सरकार की आलोचना हुई है, उतनी या उससे अधिक प्रशंसा इस विधेयक को पारित करने पर होनी चाहिए।
मगर, चौहान यह भूल गए कि अभी तो मप्र विधानसभा ने यह प्रस्ताव पारित किया है। अभी राष्ट्रपति द्वारा इस पर मुहर लगनी बाकी है। तब तक इस पर पीठ थपथपाना जल्दबाजी है, मगर उनकी निगाह में मिशन 2018 और इस विधानसभा चुनाव में राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह द्वारा दिया गया 200 से अधिक सीट जीतने का लक्ष्य ही है। वे इस लक्ष्य को पाने के लिए एड़ी चोटी का जोर लगाना चाहते हैं और ऐसे में जल्दबाजी किए जा रहे हैं। अन्यथा वे बैठक में यह नहीं कहते कि मुख्यमंत्री के सम्मान समारोह में उन आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं को मत लाना जो अच्छी प्रतिक्रिया न दें। पढ़ी-लिखी महिलाएं लाना ताकि उनके चेहरे पर इस निर्णय की खुशी दिखाई जा सके। हो सकता है कि नंदकुमार यह बात भी पॉलिटिकल माइलेज लेने की व्यग्रता में कह गए हैं। 
वे जरा इत्मीनान से सोचेंगे तो पाएंगे कि यह कानून बनाना प्रशंसनीय है, मगर चिंता का कारण यह है कि मप्र में दुष्कर्म के मामले तेजी से बढ़ते जा रहे हैं। मप्र पुलिस ने चार्जशीट दायर कर अधिकतर मामलों में सजा दिलवाने का प्रयास किया है, लेकिन कई मामलों में रिपोर्ट लिखने से लेकर सजा मिलने तक अपराधी छूट जाते हैं। सरकार को ऐसा विधेयक लाना ही था। यह उसका दायित्व है मगर इसका कैसा राजनीतिक लाभ उठाना है यह तो पार्टी के मुखिया को सोच समझकर तय करना चाहिए। ऐसा न हो कि उत्साह के अतिरेक में अच्छा कार्य भी प्रश्‍नों से घिर जाए। किसान आंदोलन के समय ऐसा हो भी चुका है जब किसानों द्वारा मुख्यमंत्री का सम्मान करने की प्रदेश अध्यक्ष की घोषणा को स्वयं मुख्यमंत्री के आग्रह पर टालना पड़ा था। राजनीतिक शह-मात के खेल में चौहान के ऐसे बोल कितना पॉलिटिकल माइलेज देंगे, कहना मुश्किल है।

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