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जानिए क्यों बढ़ रही शिवराज की चिंता

2017-12-06 09:22:32 404
Sandhya Desh


वैसे तो मध्यप्रदेश को भाजपा का गढ़ कहा जा सकता है। लेकिन शहरी इलाकों को छोड़ गांवों में आज भी भाजपा का जनाधार कम है। गांवों में जहां कांग्रेस की लहर रहती है तो वहीं शहरों में भाजपा राज है। परंतु 15 साल के शासन पर एंटीइनकमबैंसी और कांग्रेस की तेज होती धार शिवराज की चिंता बढ़ा रही है। 
मध्यप्रदेश की कर्म भूमि पर हम कह सकते है भाजपा सरकार अपने 15वें वर्ष में प्रवेश कर चुकी है। वहीं मुख्यमंत्री के रूप में शिवराज 13वें वर्ष में जा रहे है। शिवराज की कई लोकप्रिय योजनाओं ने पूरे देश में वाहवाही लूटी है। वहीं किसान पुत्र की छवि भी वोटों में तब्दील हुई। परंतु वर्तमान में जमीन को पढ़ा जाये तो सत्ता विरोधी लहर की हल्की बू आ सकती है। साथ ही वर्षों से उपेक्षित कर्मठ कार्यकर्ता का असंतोष भी साफ झलकता है। इन सबके बीच एंटीइनकमबैंसी भी अपना दखल दिखा रही है।
विगत 14 वर्ष के भाजपा के शासन पर हर बार प्रशासन हावी रहने का इल्जाम लगता रहा है। साथ ही भ्रष्टाचार के बड़े आरोपों ने भी सरकार की छवि पर गहरा दाग छोड़ा है। व्यापमं जैसा घोटाला, किसान आंदोलन और रोज रिश्वतखोर अधिकारियों के पकड़े जाने से सरकार की इमेज बदल चुकी है। किसान आंदोलन इस किसान पुत्र के लिए सबसे बुरा अनुभव रहा। कहा जा सकता है आज भी किसान इस सरकार से बहुत नाराज है। 
डूब प्रभावित लोग भी इस सरकार से संतुष्ट नहीं है। फिर केन्द्र सरकार की नोटबंदी और जीएसटी जैसी स्कीम ने छोटे और मझौले व्यापारियों के सामने दोबारा वोट देने को सोचने पर मजबूर किया हैं। परंतु शिवराज अपनी लोकप्रियता को कितना वोटों में कैश कर पायेंगे कहा नहीं जा सकता। उपर से कांग्रेस की होती तेज धार शिवराज को चिंता में डाल रही है। शहरों में भी अब कांग्रेस का ग्राफ बढ़ रहा है। ऐसे में शिवराज के सामने कई चुनौतियां है और चुनावों में समय कम। आईये देखते है भाजपा रिपीट फार्मूले को फिर दोहरा पायेगी या बड़े वनवास के बाद कांग्रेस की वापसी होगी यह गर्त में है। 

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