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हारों के सहारे बने गये यह नेताजी

2017-12-05 09:07:58 464
Sandhya Desh


कहते है राजनीति करो तो भलाई के लिए। दीन दुखियों की सेवा के लिए, लेकिन आजकल के नेता तो हवा हवाई है। दीन दुखियों और पीड़ित की फिकर करने वाला कौन है। परंतु ग्वालियर में एक नेताजी ने पीड़ित मानवता को ही अपनी जनसेवा माना है।
यह नेताजी तो हारों के सहारे बनकर उभरे है। इनके काम थके हारे पीड़ित की जुबानी सुने जा सकते है। अब इन नेताजी ने ऐसी 151 कन्याओं के विवाह कराने का बीड़ा उठाया है जिनके पास पैसा नहीं है। विवाह योग्य कन्याओं के लिए फार्म वितरण शुरू हो गया है। फुलेरा दौज पर सामूहिक विवाह में इन सभी का धूमधाम से विवाह होगा। यह नेताजी कोई ओर नहीं ललितपुर काॅलोनी वाले सतीश भाई है। नगर निगम में सबसे सीनियर पार्षद भी है। चुनाव मैदान में उनके सामने कोई उतरता ही नहीं। र्निविरोध चुने जाते है। अपने जनहित के कामों के लिए उन्हें अपने पूरे वार्ड के साथ साथ अब पूर्व की विधानसभा में जाना जाता है। 
जनता के लिए उन्हें कई बार अपनी ही निगम सरकार से भी उन्हें लड़ता देखा गया है। उनकी पीड़ित मानवता की सेवा सबसे बड़ी पूंजी है। वह कहते है आगे भी यह अभियान जारी रहेगा, क्योंकि मानव सेवा ही नारायण सेवा है। अगर आपमें तथा है हारों का सहारा बनो, फिर देखो जिंदगी कितनी खूबसूरत लगेगी। पद मिला है तो विकास को पूंजी बनाओ, क्योंकि जिंदगी कुछ करने के लिए मिली है। अपना काम करते जाओ हिसाब ईश्वर कर रहा है। 

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