जल्द ही कांग्रेस में शामिल होंगे वरुण गांधी?

2017-11-28 12:55:07 438
Sandhya Desh


कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी की ताजपोशी के बाद पार्टी में बड़े बदलाव के संकेत मिले हैं. सूत्रों की माने तो इस बदलाव में दो भाई एक बार फिर साथ आने की खबर है. सुल्तानपुर से बीजेपी सांसद और राहुल गांधी के चचेरे भाई वरुण गांधी कांग्रेस में शामिल हो सकते हैं इस पर फैसला राहुल को लेना है.
कांग्रेस के एक बडे नेता का ऑफ रिकॉर्ड कहना है कि वरुण को बीजेपी उनके कद के मुताबिक इज्जत नहीं दे रही है. लिहाजा राहुल गांधी की ताजपोशी के वक्त पार्टी के अंदर ऐसे बड़े बदलाव देखने को मिलेगें जिनकों अभी बता पाना मुश्किल है. गौरतलब है कि वरुण गांधी हो या फिर राहुल गांधी, दोनों की तरफ से कभी खुले तौर पर एक दूसरे के खिलाफ कोई बयानबाजी नहीं हुई है. यही कारण है कि इन संकेतों को तवज्जो मिल रही है. लेकिन अगर ऐसा होता है तो गांधी परिवार करीब 35 साल बाद फिर एक साथ होगा.
आपको बता दें कि वरुण गांधी समय-समय पर अपनी बात रखते आए हैं, हाल ही में रोहिंग्या मुद्दे उन्होंने केंद्र सरकार की लाइन से अलग हटके बयान दिया था. उन्होंने कहा था कि भारत को रोहिंग्या मुसलमानों की मदद करनी चाहिए और अतिथि देवो भव: का पालन करना चाहिए.

बहन प्रियंका कर रही है मध्यस्थता
सूत्रों के मुताबिक पारिवारिक मतभेदों के बावजूद वरुण गांधी के रिश्‍ते प्रियंका से हमेशा मधुर रहे हैं. राहुल गांधी के खिलाफ भी वरुण ने कभी सीधा हमला नहीं बोला. इसी तरह राहुल गांधी ने भी विपक्षी दल में रहने के बावजूद वरुण या मेनका के खिलाफ कभी सीधा मोर्चा नहीं खोला. सूत्र बता रहे है कि वरुण की बीजेपी से जैसे-जैसे दूरी बनती रही, वैसे-वैसे वह अपने परिवार के करीब आते जा रहे है औऱ बहन प्रियंका गांधी मध्यस्थता कर रही है. 

मोदी-शाह की जोड़ी ने वरुण को लगाया किनारे 
भाजपा के लिए वरुण यूपी में एक मजबूत नेता के तौर पर उभर सकते थे, लेकिन क्षेत्रीय क्षत्रपों से परहेज करने वाली मोदी-शाह की जोड़ी ने इस संभावना को खारिज कर दिया, क्‍योंकि वरुण स्‍वतंत्र रूप से सोचने वाले नेता की पहचान रखते थे. मोदी-शाह को राज्‍यों में ऐसे नेता की जरूरत है, जो इनके खिलाफ सर ना उठा सके, इसके चलते वरुण को किनारे लगा दिया गया. 
संजय गांधी की संतान वरुण ने भी अपनी हनक और ठसक से कोई समझौता नहीं किया. वरुण जिस परिवार से आते हैं, वह केवल सांसद बन जाने तक सीमित रहने वाला परिवार नहीं है. वरुण की कुछ महत्‍वाकांक्षाएं भी थी, जो मोदी-शाह के राज में पूरी होनी संभव नहीं हैं. यानी वरुण के लिए भाजपा में भावी राजनीतिक को उजाले की राह तैयार करती नहीं दिखती. 

कांग्रेस को मिलेगी संजीवनी
बहरहाल कई राज्‍यों में हाशिए पर जा चुकी कांग्रेस को भी राहुल के साथ ऐसे नेता की तलाश थी, जो उसके लिए लाभदायक हो. भला वरुण से अच्‍छा चेहरा और कौन हो सकता था. खासकर उत्‍तर प्रदेश में वरुण तराई के पीलीभीत, लखीमपुरखीरी के साथ सुल्‍तानपुर में अच्‍छी पकड़ रखते हैं. 
कांग्रेस में शामिल होने से उत्‍तर प्रदेश में कांग्रेस को संजीवनी मिल सकती है. राहुल गांधी वरुण की इसी क्षमता का लाभ उठाकर भाजपा को पटखनी देने के साथ कांग्रेस को पुनर्जीवित करना चाहते हैं. फिलहाल सियासी हल्‍कों में वरुण के कांग्रेस में शामिल होने की चर्चा जोरों पर है. 

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