सियासत में ऐसे बढ़ाए दिग्गी राजा ने मजबूत कदम, कभी कम नहीं हुआ दम

2018-11-13 12:46:30 583
Sandhya Desh


आज के दौर में ये सोचा भी नहीं जा सकता कि कोई शख्स दस साल तक चुनावी राजनीति से दूर रहे और इसके बाद भी उसका सियासी रसूख वैसा ही बना रहे. लेकिन, ये कारनामा करके दिखाया है सूबे के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने. दिग्विजय को यूं ही कांग्रेस की राजनीति का चाणक्य नहीं कहा जाता. दस साल तक चुनाव नहीं लड़ने के बावजूद वे मध्यप्रदेश ही नहीं बल्कि देश की राजनीति को अपनी उंगलियों पर नचाने का माद्दा रखते हैं.
दिग्विजय को उनके दौर के उन चुनिंदा नेताओं में गिना जाता है, जो केवल अपनी रणनीति के दम पर सियासी धारा बदल सकते हैं. यही वजह है कि मध्यप्रदेश की छोटी सी नगरपालिका राघौगढ़ के चेयरमैन पद से शुरूआत करने के बावजूद वे सूबे के सबसे बड़े आसन तक पहुंचे और दस साल तक उस पद पर बने भी रहे. 

* दिग्विजय सिंह 30 साल की उम्र में पहली बार विधायक बने
* महज 33 साल की उम्र में वे अर्जुन सिंह की सरकार में सबसे युवा मंत्री बने
* 1993 में वे पहली बार प्रदेश के मुख्यमंत्री बने

2003 तक सीएम रहते हुए दिग्गी राजा ने दो कार्यकाल पूरे किये
2003 का चुनाव हारने के बाद अपनी जुबान से निकली बात को सच करते हुए दिग्विजय सिंह ने दस साल चुनाव नहीं लड़ा. लेकिन, प्रदेश और देश की राजनीति को प्रभावित करते रहे. 2018 के विधानसभा चुनाव से पहले जब लोग सोच रहे थे कि दस साल तक चुनावी राजनीति से दूर रहने के बाद दिग्विजय सिंह ने सियासी ताकत खो दी होगी, तब उन्होंने कथित गैर-राजनीतिक नर्मदा यात्रा के जरिये राजनीति के अपने पुराने आयाम दोबारा साध लिए. यहां तक कि कांग्रेस के टिकट वितरण में भी दिग्गी राजा की धाक जमकर दिखी. उन्होंने अपने बेटे, भाई और भतीजे तीनों को टिकट दिला दी.
सक्रिय राजनीति से अपने वनवास के बाद नर्मदा यात्रा के जरिये उन्होंने ऐसी वापसी की कि चुनावी साल में शांत बैठी कांग्रेस अचानक अटैकिंग मोड में आ गई. पार्टी के नेताओं द्वारा दिग्विजय सिंह से एक निश्चित दूरी बनाने के बावजूद राजनीतिक जानकार मानते हैं कि अगर मध्यप्रदेश में कांग्रेस सत्ता में आई तो उसका मुख्यमंत्री, दिग्विजय सिंह की मर्जी के बिना नहीं बन सकेगा. वहीं,  कुछ लोग तो दिग्विजय सिंह के कांग्रेस के बड़े कार्यक्रमों से दूर रहने को उनकी नाराजगी नहीं बल्कि कांग्रेस की रणनीति भी मानते हैं. ऐसे में ये कहना गलत नहीं होगा कि अपनी उम्र की वजह से राजनीतिक ढलान की ओर होने पर भी दिग्विजय सिंह सूबे की राजनीति की एक बड़ी ताकत हैं. 

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