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शिवराज का सियासी सफर: किसान के बेटे से सीएम तक

2018-10-19 09:45:12 166
Sandhya Desh


शिवराज सिंह, वो शख्सियत जो करीब डेढ़ दशक से सूबे के सबसे शक्तिशाली पद पर बैठी है, लेकिन एक किसान के बेटे के सत्ता के शिखर तक पहुंचने के सफर में कई ऐसे पड़ाव हैं जिन्होंने उन्हें इस मुकाम को हासिल करने लायक बनाया. 5 मार्च 1959 को एक किसान परिवार में जन्मे शिवराज में नेतृत्व के गुण बचपन में ही दिखने लगे थे जब वे अपने खेतों में मजदूरी करने वालों के लिए अपने पिता प्रेम सिंह से ही भिड़ गए.
13 सालों से सीएम की कुर्सी पर काबिज शिवराज सिंह आज भले ही सूबे के सफल मुख्यमंत्री कहलाते हों, लेकिन उनके राजनीतिक करियर की शुरूआत संघ के मामूली कार्यकर्ता के तौर पर हुई थी. इमरजेंसी के दौर में जेल जाने से उनकी नेतृत्व क्षमता मजबूत हुई. 1975 में छात्र राजनीति से शुरूआत करने वाले शिवराज सिंह को 1990 में पहली बार बीजेपी के टिकट पर सीहोर की बुधनी विधानसभा सीट से चुनाव लड़ने का मौका मिला. महज एक साल बाद पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने अपनी लोकसभा सीट विदिशा से शिवराज सिंह को उत्तराधिकारी बनाया. 
अपनी सादगी के लिए पहचाने जाने वाले शिवराज सिंह उतने ही विनम्र भी हैं. सियासी गलियारों में उनके बारे में एक किस्सा प्रसिद्ध है. 2003 में शिवराज सिंह केंद्र सरकार में राज्य मंत्री बनने वाले थे जिसकी सूचना खुद प्रमोद महाजन ने उन्हें फोन के जरिये दी थी, लेकिन जिस दिन उन्हें शपथ ग्रहण करनी थी, उसी दिन प्रमोद महाजन ने दोबारा फोन कर बताया कि उनकी जगह प्रह्लाद पटेल को मंत्री बनाया जाएगा. इसके बावजूद शिवराज सिंह ने कोई नाराजगी जाहिर नहीं की. इसी का परिणाम था कि 2005 में सूबे के मुखिया के रूप में वे पार्टी के शीर्ष नेतृत्व की पहली पसंद बन गए. तब से अब तक उनके राजनीतिक करियर में तमाम उतार-चढ़ाव आए. व्यापम के आरोपों ने उनकी छवि भी खराब की, लेकिन 13 साल से अब तक सीएम की कुर्सी पर शिवराज सिंह विराजमान हैं.

* शिवराज सिंह 2003 में बीजेपी युवा मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष बने
* वे विदिशा से पांच बार सांसद चुने गए
* 29 नवंबर 2005 को उन्होंने पहली बार सीएम पद की शपथ ली
* पिछले13 साल से वे मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री हैं.


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