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वंशवाद का जिन्न फिर बोतल से बाहर, नहीं दिखते नये मोहरे

2018-10-17 08:55:13 295
Sandhya Desh


राजनीति का वंशवाद से रिश्ता कोई नई बात नहीं है. जिसका आजादी के बाद से ही लोकतांत्रिक व्यवस्था में खूब बोलबाला रहा है. लेकिन, अब ये विकराल रुप लेता जा रहा है. सांध्यदेश के मुताबिक यही वजह है कि जब भी चुनावी बिगुल बजता है, वंशवाद का जिन्न बोतल से बाहर आ जाता है और इस पर नई बहस शुरु हो जाती है. 
सियासी दलों के सरपरस्त अपने विरोधियों पर हमला बोलते हुये खुद को लोकतंत्र का सच्चा सिपाही बताने से नहीं चूकते. हृदयप्रदेश में चुनावी समर में वंशवाद पर बहस चल रही है क्योंकि यहां की राजनीति में भी वंशवाद का लहू उसकी रगों में बह रहा है. सांध्यदेश के मुताबिक रसूखदारों ने अपनी अगली पीढ़ी को सियासत का पाठ खूब पढ़ाया और आगे चलकर उन्हें सियासत के मंच पर भी खड़ा कर दिया. वहीं, 2018 के विधानसभा चुनाव में भी कई नामदार सियासी रण में कूदने को बेताब नजर आ रहे हैं. सांध्यदेश के मुताबिक वर्तमान में कई ऐसे विधायक हैं जो वंशवाद की बदौलत ही विधानसभा में बैठ रहे हैं. जिनकी संख्या करीब एक दर्जन है.

वर्तमान विधानसभा में वंशवाद का प्रभाव
नेता                                वंशज
अर्जुन सिंह                     अजय सिंह (बेटा)
दिग्विजय सिंह                 जयवर्धन सिंह (बेटा)
कैलाश जोशी                  दीपक जोशी (बेटा)
सुंदरलाल पटवा               सुरेंद्र पटवा(भतीजा)
कैलाश सारंग                  विश्वास सारंग (बेटा)
श्रीनिवास तिवारी              सुंदरलाल तिवारी (बेटा)
सुभाष यादव                   सचिन यादव (बेटा)
सत्येंद्र पाठक                  संजय पाठक (बेटा)
गोविंद नारायण सिंह         हर्ष सिंह (बेटा)
थावरचंद गहलोत             जितेंद्र गहलोत (बेटा)
ओमप्रकाश सखलेचा        वीरेंद्र सखलेचा (बेटा)
श्रवण पटेल                    निशिथ पटेल (बेटा)
प्रेम सिंह                        राजवर्धन सिंह (बेटा)
प्रेमचंद वर्मा                    राजेंद्र वर्मा (बेटा)
रामेश्वर पटेल                 सत्यनारायण पटेल (बेटा)
लक्ष्मीनारायण शर्मा         शैलेंद्र शर्मा (बेटा)
अर्चना चिटनीस               बृजमोहन मिश्रा(बेटी)


ये वो नाम हैं जिनको अपने वालिदों से सियासत विरासत में मिली है. इनके पिता भी मध्यप्रदेश की राजनीति में विभिन्न पदों पर रहे हैं, जबकि 14वीं विधानसभा में इनके पुत्र भी विधायक चुने गये हैं. सांध्यदेश के मुताबिक इनमें कुछ तो पहले से पहुंच रहे थे, जबकि कुछ पहली बार विधानसभा की सीढ़ियों पर कदम रखे हैं.

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