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रावण ने अपने भाई को लंका से निकाला, विभीषण पहुंचे भगवान की शरण में

2018-10-16 16:13:51 49
Sandhya Desh

ग्वालियर। छत्री प्रागंण में चल रही रामलीला में बीती रात लंकापति रावण और उसके अनुज विभीषण के संवाद का मंचन किया गया।  विभीषण अपने भाई रावण को समझाता है कि श्रीराम से बेर ठीक नहीं है, आप सीता माता को सम्मान सहित श्रीराम के पास पहुचा दो इसी में आपकी भलाई है। रावण क्रोधित होकर विभीषण को लात मारकर लंका से निकाल देता है। विभीषण श्रीराम की शरण में जाते है। श्रीराम विभीषण को अपना मित्र बनाते है। श्रीराम समुद्र देवता की आराधना करते है। तीन दिन तक अराधना करने के बाद जब समुद्र देवता रास्ता नहीं देते है तो श्रीराम क्रोधित होकर समुद्र देवता को सुखाने के लिए जैसे ही धनुष चलाते है तभी समुद्र देवता प्रकट होते है और बताते है कि आपकी सेना में नल-नील नामक दो वानर है उनको यह वरदान हे कि वो जो भी वस्तु समुद्र में फेकेगें वह उूबेगी नहीं । तब श्रीराम नल-नील और वानर सेना की सहायता से सेतुबंध बनाते हे। श्रीराम रामेश्वर की स्थापना करते है । पूजा पाठ के लिए वह रावण को बुलाते है और इस प्रकार रामेश्वर की स्थापना करते है। तत्पष्चात श्रीराम रावण को एक ओर मौका देते है कि वह शान्तिपूर्वक सीता को बापस कर दें। इस हेतु वह अंगद को शांति दूत के रूप में रावण के पास भेजते है। अंगद जब रावण के दरबार में पहुचता है तो दोनो के मध्य रोचक संवाद होता है। तब अंगद कहता है रावण तुम्हारे दरबार में अगर कोई भी वीर मैरा पैर हिला दे तो मैं वचन देता हूॅ कि श्रीराम बापिस अयोध्या चले जायेगे। अंगद रावण के दरबार में पेर जमाकर खडा हो जाता है और एक-एक वीर अंगद का पैर उठाने की कोषिष करते है लेकिन उठा नहीं पाते है, तब रावण स्वयं उठकर अंगद के पैर को उठाने की कोषिष करता है तो अंगद अपना पैर हटा लेता है और कहता है कि मैरे पैर क्या पड़ता हैं श्रीराम के पैर पड़ तो तैरा कल्याण होगा । आज की रामलीला में लक्ष्मण शक्ति ओर हनुमान जी की 300 फीट उची उडान की लीला का मंचन किया  जायेगा ।  

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