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ज्योतिरादित्य के ग्वालियर सीट से लड़ने के कयास, उज्जैन का विचार त्यागा

2018-10-08 18:14:53 1307
Sandhya Desh


इस बार राज्य के विधानसभा चुनाव राजनैतिक रूप से जबरदस्त गरमाहट वाले रहेंगे। कांग्रेस की ओर से प्रदेश अध्यक्ष कमलनाथ, पूर्व केन्द्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया, सुरेश पचौरी, अजय सिंह राहुल, पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह कमान सम्हालेंगे तो वहीं भाजपा की ओर से मुख्यमंत्री शिवराज सिंह, भाजपा की चुनाव अभियान समिति के संयोजक नरेन्द्र सिंह तोमर, राष्ट्रीय उपाध्यक्ष प्रभात झा, राष्ट्रीय महामंत्री कैलाश विजयवर्गीय राज्य की चुनाव कमान के हीरो होंगे।
लेकिन इस बार मुकाबले बड़े ही रोमांचक होने जा रहे हैं, अब पूर्व केन्द्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने मालवा अंचल के राजनैतिक घटनाक्रमों के चलते उज्जैन से ध्यान हटाकर ग्वालियर से लड़ने की प्लानिंग की है। सूत्रों की माने तो कांग्रेस नेता सिंधिया अंचल में कांग्रेस पक्ष की आवोहवा बनाने के लिये उपनगर ग्वालियर की विधानसभा सीट से मैदान में आ सकते हैं, जिस कारण उनका मुकाबला उनके धुर विरोधी व राज्य के उच्च शिक्षा मंत्री जयभान सिंह पवैया से हो सकता है। यदि यह मुकाबला हुआ तो प्रदेश क्या देशभर में राजनैतिक पंडितों की निगाहें इस सीट पर होंगी।
कुल मिलाकर भाजपा के बजरंगी नेता जयभान सिंह पवैया का जनाधार इस सीट पर अच्छी दखल रखता है। वह 1998 के लोकसभा चुनाव में इस विधानसभा सीट पर स्व. माधवराव सिंधिया के खिलाफ पौने ग्यारह हजार वोटों से बढ़त बनाकर राजनैतिक पंडितों को चौंका चुके है। वहीं 2014 के लोकसभा चुनाव में पवैया पूर्व केन्द्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया के खिलाफ लोकसभा चुनाव में गुना शिवपुरी की विधानसभा सीट पर भी बढ़त रख चुके है। 
कुल मिलाकर राजनीति के इन दो सितारों के संभावित मुकाबले की खबरों से ग्वालियर अंचल का चुनावी गणित सुर्खियों में रह सकता है। लेकिन ज्योतिरादित्य सिंधिया के ग्वालियर सीट से लड़ने के कयासों के चलते कांग्रेस के टिकट चाहने वाले संभावित उम्मीदवार पूर्व विधायक प्रघुम्न सिंह तोमर सहित कांग्रेस नेता सुनील शर्मा, अशोक शर्मा, राजेन्द्र नाती व अशोक प्रेमी के हॉव भाव शांत हैं।
वर्षों राजनैतिक संघर्ष करने के बाद अब उम्मीदवारी की संभावना के धूमिल होने संबंधी खबरों से कांग्रेस नेता बैचेन हैं। वहीं भाजपा के नेता संभावित मुकाबले के रोमांचक होने की खबरों के चलते एकजुट हो गये है और संघ समर्थक भाजपाइयों की टीम भी मजबूत कर दी गई है। कार्यकर्ता अपने बजरंगी नेता के लिए अलग से रणनीति बनाने में लगें हैं। 

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