Recent Posts

ताका-झांकी

बैंकिंग और मोबाइल सेवाओं के लिए आधार जरूरी नहीं

2018-09-26 15:02:28 231
Sandhya Desh

सुप्रीम कोर्ट ने आधार को दी संवैधानिक मान्यता
नई दिल्ली। आधार की संवैधानिकता पर सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है. पांच जजों की बेंच में तीन जजों ने बहुमत से फैसला सुनाते हुए आधार को संवैधानिक मान्यता दे दी. इसके साथ ही कोर्ट ने कई शर्तें भी लगाई हैं. तीन जजों ने बहुमत से फैसला पढ़ते हुए कहा कि बैंकिंग और मोबाइल सेवाओं के लिए आधार जरूरी नहीं है. सुप्रीम कोर्ट ने  कहा कि आधार आम नागरिक की बड़ी पहचान बन गई है, पिछले कुछ दिनों में आधार की सबसे ज्यादा चर्चा हुई. इसके साथ ही कोर्ट ने पैन कार्ड बनवाने और आयकर रिटर्न फाइल करने के लिए आधार को अनिवार्य किया है. सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में साफ किया कि निजी कंपनी, व्यक्ति या कॉर्पोरेट्स आधार नहीं मांग सकते.
कोर्ट ने फैसला पढ़ते हुए कहा, ’’बैंक अकाउंट और मोबाइल से आधार लिंक करना जरूरी नहीं है. कोर्ट ने यहा भी कहा कि आधार को वित्त विधेयक की तरह पास किये जाने में कुछ गलत नहीं है.’’ बता दें कि सरकार ने बैंक अकाउंट और मोबाइल जैसी तमाम सुविधाओं के लिए आधार को अनिवार्य किया था.
कोर्ट ने कहा, ’’किसी ज़रूरतमंद को प्रमाणीकरण (बायोमेट्रिक की पुष्टि न हो पाना) की कमी के चलते लाभ से वंचित न किया जाए. सीबीएसई नीट आदि में आधार ज़रूरी नहीं, बच्चों का आधार बनाने के लिए अभिभावक की इजाज़त ज़रूरी, वयस्क होने के बाद वो खुद तय करें. स्कूल दाखिले के लिए आधार ज़रूरी नहीं है.’’ इसके साथ ही कोर्ट ने साफ किया कि 6 से 14 साल के बच्चों को आधार ना होने की वजह से सर्व शिक्षा अभियान जैसे लाभ से वंचित न किया जाए.
कोर्ट ने कहा, ’’गरीमा के साथ जीवन मौलिक अधिकार है, आधार से वंचित तबके को गरिमा मिल रही है। 99.76 प्रतिषत लोग आधार से जुड़े, अब उन्हें सुविधा से वंचित नहीं किया जा सकता.’’
सुप्रीम कोर्ट ने कहा, ’’हमें लगता है कि बायोमेट्रिक की सुरक्षा के पुख्ता उपाय हैं. किसी व्यक्ति का डेटा रिलीज़ करने से पहले उसे जानकारी दी जाए.’’ इसके साथ ही जानकारी साझा करने को लेकर भी सुप्रीम कोर्ट ने स्थिति साफ की. कोर्ट ने कहा, ’’किसी जानकारी का जारी होने क्या राष्ट्रहित में है? ये उच्च स्तर पर तय हो. जानकारी जारी करने का फैसला लेने में हाई कोर्ट जज की भी भूमिका हो. आधार एक हद तक निजता में दखल है लेकिन ज़रूरत को देखना होगा. कोर्ट ने माना कि आधार से समाज को फायदा हो रहा है.’’
आधार पर फैसला पढ़ते हुए जस्टिस सीकरी ने कहा, ’’आधार यूनीक है ये सबसे अलग बनाता है. ’बेस्ट’ होना आपको नंवर वन बनाता है लेकिन ’यूनीक’ होना ’ओनली वन’ बनाता है

Latest Updates