विशेषः मदद ने क्रिकेट दुनिया का सरताज बना दिया

2018-08-29 17:48:36 457
Sandhya Desh


* सूरज मनकेले भारतीय दिव्यांग क्रिकेट टीम का सितारा
ग्वालियर। कहते हैं कि जब मदद करने वाला सच्चे मन से मदद करें, तो मदद देवीय कृपा बन जाती है। ऐसी ही एक मदद से ग्वालियर का एक दिव्यांग क्रिकेटर आज अंर्तराष्ट्रीय क्रिकेट जगत में सुर्खियों में है। यह क्रिकेटर है सूरज मनकेले, इसके सोचा भी नहीं था कि वह कभी भारतीय दिव्यांग क्रिकेट टीम का हिस्सा होगा। सूरज मनकेले और उसके साथियों ने अभी हाल ही में श्रीलंका की दिव्यांग क्रिकेट टीम को 3-1 से हराकर 20-20 क्रिकेट स्पर्धा जीती हैं। लेकिन खेद की बात है कि पैसों और चकाचौंध  की क्रिकेट दुनिया में दिव्यांग क्रिकेटरों की कोई पूछपरख ही नहीं है, यह दिव्यांग भारतीय टीम का क्रिकेटर आज भी रोजी रोटी के लिए मोहताज है।
ग्वालियर का दिव्यांग सूरज मनकेले अपने खेल कौशल के प्रदर्शन के चलते आज भारतीय दिव्यांग क्रिकेट टीम का महत्वपूर्ण सदस्य है। वह टीम का सलामी बल्लेबाज है और विकेटकीपर भी हैं। लेकिन उसकी यह सफलता बेकार ही रह रही थी। उसे ग्वालियर का कोई भी शख्स मदद ही नहीं कर रहा था। सूरज मनकेले को टीम चयन और विभिन्न जगह मैच के लिए जाना आना पड़ता तो वह आर्थिक धनाभाव के कारण मौकों से चूक रहा था। उसकी यह जानकारी जब ग्वालियर के जेके टायर महाप्रबंधक पी. कुलकर्णी को लगी, तो उन्होंने उसकी मदद की ठानी और कुलकर्णी की मदद का यह प्रयास रंग लाया, आज सूरज मनकेले ने केवल भारतीय दिव्यांग क्रिकेट टीम का मजबूत सदस्य हैं, बल्कि वह अन्य लोगों के लिये एक रोल मॉडल भी है, जो आज कहां से कहां पहुंच गया।
सूरज मनकेले बताते है कि वह 2014 से भारतीय दिव्यांग क्रिकेट टीम के सदस्य है। उनके अनुसार उन्होंने सपने में भी नहीं सोचा था कि वह इस मुकाम पर पहुंचेंगे, लेकिन जेके टायर के जीएम कुलकर्णी की मदद ने मेरे सपनों को साकार करवा दिया है। मनकेले ने बड़े दुखी मन से कहा कि इतने बड़े शहर और पूरे प्रदेश से उन्हें आज तक किसी अन्य या सरकार ने कभी कोई मदद ही नहीं की है। आज भी वह स्वयं खेलने पर पूरा ध्यान दे रहे हैं, लेकिन सरकार ने उनकी रोजगार की कोई सुध ही नहीं ली हैं।

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