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पर्यटन स्थल के रूप में विकसित होगा नीम पर्वत

2018-08-10 19:28:12 93
Sandhya Desh


चीतल, खरगोश व मोर सहित अन्य वन्य प्राणियों ने बनाया बसेरा 
(हितेन्द्र सिंह भदौरिया)
ग्वालियर ।  जिले में सरकार और समाज की भागीदारी से बंजर पहाड़ियों पर बड़े पैमाने पर रोपे गए पौधे अब पेड़ बन चुके हैं। किसी पहाड़ी को नीम पर्वत तो किसी को आंवला पर्वत नाम दिया गया है। घाटीगाँव जनपद पंचायत के ग्राम रायपुर में स्थित नीम पर्वत तो वन्य जीवों के लिये स्वर्ग जैसा बन गया है और अघोषित लघु अभ्यारण्य का रूप ले रहा है। 
जिला पंचायत ने इस पर्वत को पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने का फैसला किया है। इसी उद्देश्य से बीते दिनों यहाँ जिला पंचायत की साधारण सभा की बैठक आयोजित की गई। जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी शिवम वर्मा ने बताया कि नीम पर्वत पर चीतल, खरगोश, मोर एवं अन्य वन्य प्राणी विचरण करते हुए देखे जा सकते हैं। उन्होंने बताया कि वन्य प्राणी निर्भीक एवं सुरक्षित रूप से रह सकें, इसके इंतजाम किए जा रहे हैं। नीम पर्वत पर नीम के अलावा आंवला, अमरूद जैसे पौधे भी लगाए गए थे, जो अब पेड़ बनकर फल देने लगे हैं। वर्मा ने बताया कि नीम पर्वत क्षेत्र से कार्बन क्रेडिट विक्रय की संभावनाओं पर भी विचार किया जा रहा है।
उन्होंने बताया ग्वालियर शहर से लगभग 20 किलोमीटर दूर स्थित नीम पर्वत को इस अंदाज में विकसित करने की कार्ययोजना बनाई जा रही है, जिससे ग्वालियर शहर एवं नजदीक के गाँव एवं देशी-विदेशी पर्यटकों के लिये आकर्षण का केन्द्र बने। 

मसूरी से प्रशिक्षु आईएएस भी आते हैं नीम पर्वत देखने 
मनरेगा (महात्मा गाँधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना) के तहत ग्वालियर में नीम पर्वत सहित दो दर्जन से अधिक बंजर पहाड़ी एवं मैदानों पर लाखों पौधे रोपे गए हैं, जो अब पेड़ की शक्ल अख्तियार कर चुके हैं। ग्वालियर जिले में हुए सफल वृक्षारोपण को देखने के लिये लाल बहादुर शास्त्री प्रशासनिक अकादमी मसूरी में प्रशिक्षण लेने वाले भारतीय प्रशासनिक सेवा के प्रशिक्षु अधिकारी भी समय-समय पर आते हैं। साथ ही योजना आयोग, मंत्रिगण एवं अन्य प्रतिनधि मण्डल इस वृक्षारोपण को देखने आ चुके हैं। 
 

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