बाल श्रमिकों को मुख्यधारा से जोड़ने के प्रयास तेज किए जाएं – कलेक्टर

2018-08-10 19:22:57 56
Sandhya Desh


ग्वालियर । ऐसे बालक-बालिकाएं जो 14 वर्ष से कम उम्र के हैं और वे किसी स्थान पर कार्य कर रहे हैं। जिसके कारण बच्चे स्कूल तक नहीं पहुँच पाते हैं और शिक्षा से भी वंचित हो जाते हैं। ऐसे बालक-बालिकाओं को राष्ट्रीय बाल श्रम परियोजना के तहत सर्वेक्षण कर मुख्यधारा से जोड़ा जाए। ऐसे बच्चों को शिक्षा देने तथा बाल श्रम से दूर करने के प्रयास तेज किए जाएं। यह निर्देश कलेक्टर अशोक कुमार वर्मा ने संबंधित अधिकारियों को दिए। 
शुक्रवार को कलेक्ट्रेट के सभाकक्ष में जिला बाल श्रम उन्मूलन समिति की बैठक आयोजित की गई। बैठक में जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी शिवम वर्मा, सहायक आयुक्त श्रम विभाग भगवत प्रसाद, परियोजना निदेशक राष्ट्रीय बाल श्रम परियोजना ओ पी मिश्रा, मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी मृदुल सक्सेना, जिला परियोजना समन्वयक विजय दीक्षित सहित महिला बाल विकास एवं गैर सरकारी संगठनों के प्रतिनिधि उपस्थित थे। कलेक्टर वर्मा ने निर्देश दिए कि एजेन्सी का निर्धारण कर सर्वेक्षण किया जाए और बाल श्रम से जुड़े बच्चों को चिन्हित करें। इसमें प्रयास यह होना चाहिए कि बाल श्रम करने वाले अधिक से अधिक बच्चों को बाल श्रम से छुड़ाकर शाला तक पहुँचाना है, ताकि वह अच्छी शिक्षा ग्रहण कर सकें। इसके साथ ही बच्चों को किताबें एवं अन्य आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं। उन्होंने कहा सर्वेक्षण कार्य में राष्ट्रीय सेवा योजना (एनएसएस) को भी जोड़ा जा सकता है। उन्होंने कहा सर्वेक्षण में ऐसे बच्चों को प्राथमिकता से टारगेट करें जिनके माता-पिता या कोई भी संरक्षक नहीं हैं और वे बाल श्रम कर रहे हैं।  
राष्ट्रीय बाल श्रम परियोजना के परियोजना निदेशक ओ पी मिश्रा ने बताया कि वर्तमान में जिले में 39 विशेष प्रशिक्षण केन्द्र संचालित हैं। जिनमें प्रत्येक केन्द्र में 50 बच्चों को प्रशिक्षण देने का प्रावधान है। उन्होंने बताया कि वर्तमान में इन केन्द्रों में 1188 बालक-बालिकाएं शिक्षा ग्रहण कर रही हैं। इन कामकाजी बच्चों को परियोजना के अंतर्गत प्रतिमाह 400 रूप्ए की राशि इनके खातों में डीबीटी के माध्यम से भेजी जाती है। बच्चों को प्रतिदिन मध्यान्ह भोजन भी प्रदान किया जा रहा है। कलेक्टर ने कहा कि ऐसे बच्चों को बाल संरक्षण गृहों में रखा जा सकता है। जिले में बालक व बालिका आवासीय संरक्षण गृह संचालित किए जा रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि बच्चों का प्रतिमाह रेग्यूलर हैल्थ चैकअप किया जाए। सभी बच्चों के आधारकार्ड भी होना चाहिए।   

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