तोरिया की नई किस्म अंचल के किसानों के लिए वरदान

2018-06-12 18:29:47 71
Sandhya Desh


ग्वालियर। तेल के लिए उपयोगी सरसों की फसल के बाद गेहूं की फसल लेने में होने वाली कठिनाई को दूर करने की दिशा में तोरिया की नई किस्में एक बेहतर विकल्प सिद्ध हो रही हैं। आकस्मिक फसल योजना के लिए हाल ही में तोरिया की एक नई किस्म राजविजय 3 को राज्य के लिए अनुशंसित किया गया है। अधिकतम 100 दिन में पकने तथा तेल का अधिक प्रतिशत (41.30) होने से इसे किसानों के लिए बहुत उपयोगी माना गया है।
राजविजय तोरिया 3 किस्म की मध्यप्रदेश में उपयोगिता देखते हुए किसान कल्याण तथा कृषि विकास विभाग ने इसे मध्यप्रदेश राज्य के लिए उपयुक्त माना है। यह निर्णय हाल ही में प्रमुख सचिव किसान कल्याण बोर्ड की अध्यक्षता में आयोजित बैठक में लिया गया। बैठक में राजमाता विजयाराजे सिंधिया कृषि विश्वविद्यालय ग्वालियर अंतर्गत आंचलिक कृषि अनुसंधान केन्द्र मुरैना द्वारा तैयार किस्म राजविजय तोरिया 3 किस्म को पूरे राज्य के लिए अनुशंसित किया गया है।
कृषि विश्वविद्यालय ग्वालियर  के कुलपति प्रो. एस. के. राव के मार्गदर्शन में इस केन्द्र में समन्वित राई सरसों परियोजना कार्यक्रम जारी है। परियोजना अंतर्गत पादप प्रजनन वैज्ञानिक डाॅ. व्ही. के. तिवारी ने पूरे मध्यप्रदेश के लिए अनुशंसित राजविजय तोरिया 3 किस्म तैयार की है। वे बताते हैं कि वर्तमान समय में फसल की सबसे बेहतर किस्म वो है जो किसान का विपरीत परिस्थितियों में साथ दे। किसान अगर खरीफ सीजन में ज्यादा पानी गिरने, कम पानी गिरने सहित तमाम कारणों से फसल नहीं लगा पाता है तो तोरिया उसे एक फसल के घाटे से बचा सकती है। 
किसान सितंबर के पहले सप्ताह में बोआई करके राजविजय तोरिया 3 की पैदावार तीन माह में ले सकता है। अपने इस गुण के कारण तोरिया की यह किस्म अंर्तवर्तीय फसल के रुप में सबसे उपयुक्त हैै। राजविजय किस्म 3 तोरिया प्रति हेक्टेयर 1351 से 1432 किलोग्राम तक उत्पादन देने में कारगर है।
डाॅ. तिवारी के अनुसार तोरिया सूखा सहनशील है सो पानी की कमी में भी किसान की आमदनी बढ़ाने में कारगर है। सरसों प्रजाति की यह किस्म माहू की व्याधि से कम प्रभावित होती है। अर्द्ध सिंचित और कम सिंचित क्षेत्रों के लिए उपयुक्त होने से इसे पूूरे मध्यप्रदेश के लिए कृषि विशेषज्ञों एवं वैज्ञानिकों ने कारगर माना है। डाॅ तिवारी के अनुसार राजविजय तोरिया 3 किस्म आकस्मिक कार्य योजना में महत्वपूर्ण स्थान रखते हुए प्रदेश की फसल सघनता बढ़ाने में उपयोगी सिद्ध होगी।

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