निपाह वायरस से बचाव एवं रोकथाम के लिए गाइडलाईन जारी

2018-05-24 19:36:35 53
Sandhya Desh


* सभी अस्पतालों में एहतियात बतौर आवश्यक उपाय करने के निर्देश 
ग्वालियर ।केरल राज्य में निपाह वायरस की वजह से हुई जनहानि को ध्यान में रखकर मध्यप्रदेश में भी पूरी सतर्कता व एहतियात बरता जा रहा है। राज्य के संचालनालय स्वास्थ्य सेवाएं द्वारा प्रत्येक जिले को एहतियात बतौर निपाह वायरस की रोकथाम एवं उपचार के लिये विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं। इस परिपालन में ग्वालियर जिले में जिला चिकित्सालय सहित सभी खण्ड चिकित्सा अधिकारी एवं संस्था प्रभारियों को ताकीद कर दिया गया है।  
संचालनालय द्वारा स्वास्थ्य विभाग के अमले को इस वायरस की रोकथाम एवं उपचार के संबंध में गाइड लाईन का पालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही शासकीय स्वास्थ्य संस्थाओं में पृथक से आइसोलेशन वार्ड और आवश्यकतानुसार पलंग आरक्षित करने को भी कहा है। संभावित रोगी पाए जाने पर मरीज के सेम्पल जांच के लिये संचालनालय के माध्यम से एनआईव्ही पुणे में भेजने को कहा गया है। सरकारी अस्पतालों में पर्सनल प्रोटेक्शन इक्यूपमेंट, मास्क तथा आवश्यक औशधियों एवं किट का पर्याप्त भण्डारण सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए गए हैं। खासतौर पर बच्चों, गर्भवती महिलाओं एवं किसी घातक बीमारी से ग्रसित व्यक्ति के एनआईव्ही संभावित होने पर अधिक सतर्कता बरतने की हिदायत दी गई है। 
मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी से प्राप्त जानकारी के मुताबिक ह्यूमन निपाह वायरस (एनआईव्ही) की बीमारी चमगादड़ द्वारा उपयोगित फल एवं अन्य कारणों से फैलती है। चमगादड़ जिन फलों को खाते हैं, अगर उन्हें सूअर व मनुष्य खा लें तो वे भी इस वायरस से संक्रमित हो जाते हैं। साथ ही यदि कोई घोड़ा चमगादड़ के संपर्क में आता है तो वह भी संक्रमित हो जाता है।   ऐसे भी साक्ष्य मिले हैं यह बीमारी मनुष्य से मनुष्य में भी फैल सकती है। इस बीमारी से मरीज की स्थिति गंभीर होने के साथ-साथ उसकी मृत्यु भी हो सकती है।

निपाह वायरस के लक्षण 
निपाह वायरस से संक्रमित मनुष्य को आमतौर पर बुखार, सिरदर्द, बेहोशी आना, उल्टी होना व झटके आना जैसी शिकायत हो सकती है। साथ ही मरीज मानसिक भ्रम और कोमा में भी जा सकता है। इस वायरस से संक्रमित मरीज को सांस लेने में दिक्कत और जलन महसूस होती है। वक्त पर इलाज न मिलने पर मरीज की जान भी जा सकती है। 

बचाव एवं सावधानी 
चमगादड़ व सूअर से बचाव रखें। जो फल कीड़ों या पक्षी द्वारा कुतरे हुए हों, ऐसे फलों का सेवन न करें। सब्जियों एवं फलों को धोकर खाएं। कटे व रखे हुए फलों को न खाएं। जिन पेड़ों पर चमगादड़ रहते हैं, उनके नीचे न बैठें। बुखार या सिरदर्द होने पर अस्पताल में स्वास्थ्य परीक्षण कराएं। 
 

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