पंजीयन मुद्रांक शुल्क में की गई एक फीसदी वृद्घि को वापिस लिया जाए : चेम्बर

2018-04-17 18:58:35 66
Sandhya Desh


ग्वालियर| दस्तावेजों के पंजीयन मुद्रांक शुल्क में अध्यादेश लाकर की गई एक फीसदी वृद्घि को तत्काल वापिस लिए जाने हेतु म.प्र. चेम्बर ऑफ कॉमर्स एण्ड इण्डस्ट्री द्बारा प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान, वित्त एवं वाणिज्यिक कर मंत्री जयंत मलैया सहित, फेडरेशन ऑफ म.प्र. चेम्बर्स ऑफ कॉमर्स तथा प्रदेश के समस्त चेम्बर्स को पत्र प्रेषित किये गये हैं| 
चेम्बर अध्यक्ष अरविन्द अग्रवाल, संयुक्त अध्यक्ष यश कुमार गोयल, उपाध्यक्ष सुरेश बंसल, मानसेवी सचिव डॉ. प्रवीण अग्रवाल, मानसेवी संयुक्त सचिव जगदीश मित्तल व कोषाध्यक्ष गोकुल बंसल ने बताया कि स्टाम्प शुल्क की राशि को बढाने के लिए राज्य सरकार ने मध्यप्रदेश नगर पालिक विधि संशोधन अध्यादेश २०१८ लागू कर दिया है| इस संशोधन में दस्तावेजों के पंजीयन मुद्रांक शुल्क में ५० प्रतिशत तक की बढोत्तरी की गई है, जिससे रजिस्ट्री कराना, लोन लेना, वसीयत कराना महंगा हो जाएगा| उदाहरणार्थ- वर्तमान में किसी व्यक्ति को २५ लाख के आवास क्रय, विक्रय के लिए दो फीसदी स्टाम्प शुल्क अर्थात् ५०,०००/- देना होता था| अब उक्त आदेश के बाद तीन फीसदी पंजीयन मुद्रांक शुल्क देना होगा अर्थात् ७५,०००/- रूपये मुद्रांक शुल्क लगेगा| 
पदाधिकारियों ने अवगत कराया है कि मध्यप्रदेशवासियों को चुनावी वर्ष में कर वृद्घि का सामना करना पड़ रहा है, राज्य शासन द्बारा राजस्व में बढोत्तरी के लिए जिस प्रकार कर की दरों में वृद्घि की जा रही है तथा प्रशासनिक अमले को राजस्व लक्ष्य पूर्ति हेतु जो टारगेट दिये जा रहे हैं, उससे व्यापारी एवं उद्योगपति सहित आम नागरिक भयभीत और परेशान हैं तथा उनके मन में राज्य सरकार के प्रति रोष की भावना भी उत्पन्न हो रही है| चुनावी वर्ष में राज्य सरकार के प्रति लोगों की नाराजगी आगामी चुनावों में सरकार के लिए मुश्किल खड़ी कर सकती है| प्रदेश की जनता पूर्व से पेट्रोल, डीजल पर अधिकतम कर की मार से परेशान है, ऐसे में राज्य सरकार द्बारा अपनी घोषणाओं की पूर्ति हेतु राजस्व के लिए कर में वृद्घि के लिए अध्यादेश लाना न्यायोचित नहीं है| 
चेम्बर ने पत्र के माध्यम से मांग की है कि दस्तावेजों के पंजीयन के लिए मुद्रांक शुल्क को पूर्व की भांति २% ही रखा जाए तथा अध्यादेश द्बारा की गई १ प्रतिशत की वृद्घि को शीघ्रातिशीघ्र वापिस लेकर, व्यापारी, उद्योगपति सहित आम नागरिकों को राहत प्रदान की जाए| 

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