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​​भगवा आतंकवाद- कांग्रेस की खुली पोल : कैलाश विजयवर्गीय

2018-04-17 15:42:07 106
Sandhya Desh


हैदराबाद की मक्का मस्जिद विस्फोट के सभी आरोपियों के विशेष एनआईए अदालत से सबूतों के आरोप में बरी होने के बाद कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी, मनमोहन सिंह की सरकार में गृह मंत्री रहे सुशील कुमार शिन्दे, पी चिदम्बरम और जोर-शोर से भगवा आतंकवाद का हल्ला मचाने वाले दिग्विजय सिंह समेत तमाम नेताओं की सच्चाई सामने आ गई है। 18 मई 2007 में हैदराबाद की मक्का मस्जिद में हुए विस्फोट में नौ लोग मारे गए थे और 58 घायल हुए थे। अदालत ने स्वामी असीमानंद, देवेंद्र गुप्ता, लोकेश शर्मा, भारत मोहनलाल रत्नेश्वर उर्फ भारत भाई और राजेंद्र चौधरी को बरी करने का फैसला सुनाया है। वैसे तो इन सबके बरी होने के पहले ही हिन्दू आतंकवाद और भगवा आतंकवाद के नाम पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शीर्ष पदाधिकारियों को फंसाने की साजिश का भंडाफोड हो चुका था। सबसे बड़ा सवाल तो यह है कि मालेगांव ब्लास्ट, समझौता एक्सप्रेस ब्लास्ट, हैदराबाद का मक्का मस्जिद ब्लास्ट और अजमेर शरीफ़ दरगाह में हुए विस्फोट के पीछे कौन जिम्मेदार था। पुलिस, केंद्रीय जांच ब्यूरो और एनआईए ने विस्फोटों के असली गुनाहगारों को पकड़ने की बजाय हिन्दू नेताओं को घेरने की रणनीति क्यों तैयार की? कांग्रेसी सरकार के इशारे पर जांच एजेंसियां हिन्दू संगठनों और नेताओं को फंसाने में लगी रही और पाकिस्तान समर्थित आतंकवादी एक के बाद एक बम धमाकों की घटनाओं को अंजाम देते रहे। 
मामला एकदम स्पष्ट है कि कांग्रेसी प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की अगुवाई वाली यूपीए सरकार ने हिन्दूत्व, हिन्दू संगठनों और हिन्दू नेताओं को विस्फोटों में फंसाकर एक समुदाय के वोट बटोरने के लिए तुष्टीकरण की नीति के तहत भगवा आतंकवाद या हिन्दू आतंकवाद का नया नारा पाकिस्तान समर्थित आतंकवादियों को बचाने के लिए किया। हिन्दू आतंकवाद का नारा गढ़ने के लिए 2006 में मालेगांव, 2007 में अजमेर शरीफ, समझौता एक्सप्रेस और 2008 में मक्का-मस्जिद में हुए विस्फोटों में सिलसिलेवार हिन्दू संगठनों से जुड़े लोगों को गिरफ्तार किया गया। सबसे बड़ी बात जो बाद में सामने आई थी, वह थी कि जांच एजेंसियों की रिपोर्ट में कहीं भी भगवा आतंकवाद या हिन्दू आतंकवाद का जिक्र नहीं किया। इस सच्चाई के बावजूद कांग्रेस के नेता भगवा आतंकवाद और हिन्दू आतंकवाद की रट लगाए रहे। सबसे पहले अगस्त 2010 में पी चिदम्बरम ने भगवा आतंकवाद शब्द गढ़ा और फिर डेढ साल बाद जनवरी 2013 में तत्कालीन गृह मंत्री सुशील कुमार शिंदे ने हिन्दू आतंकवाद कहकर मुस्लिम आतंकवाद को बढ़ावा दे दिया। यह सब हिन्दू संगठनों के नेताओं की फंसाने की मंशा से जानबूझकर किया गया। 2007 में हुए इस ब्लास्ट की शुरुआती छानबीन पुलिस ने की थी बाद में यह मामला सीबीआई को सौंपा गया। में 2011 में यह मामले जांच एनआईए को सौंपी गई। जांच एजेंसियों ने हिन्दू संगठनों को बदनाम करने के लिए हिन्दू नेताओं को फंसाने की साजिश में झूठे गवाह किए। केवल हैदराबाद मक्का मस्जिद मामले में ही कुल 160 चश्मदीद गवाहों के बयान दर्ज कराए गए थे। कई गवाहों ने गवाही के दौरान अपने बयान पलट दिए। पूरी सुनवाई के दौरान 226 गवाहों से पूछताछ हुई और 411 कागजात पेश किए गए। कांग्रेसी सरकार की मंशा थी कि पूरे विश्व में हिन्दू धर्म, हिन्दू संगठनों के नेताओं, साधू-संतों की छवि खराब की जाए। 
यह भी सच सामने आया कि किस तरह से स्वामी असीमानंद से मजिस्ट्रेट के सामने भी जबरन कबूल कराया गया कि अजमेर दरगाह, हैदराबाद की मक्का मस्जिद और कई अन्य जगहों पर हुए बम धमाकों में उनका और कई अन्य हिंदू चरमपंथी संगठनों का हाथ है। इसके साथ ही राष्ट्रीय स्वय़ंसेवक संघ के सर संघचालक माननीय मोहन भागवत, वरिष्ठ प्रचारक इन्द्रेशजी और अन्य नेताओं को फंसाने का पूरी साजिश रची गई। संघ और अन्य अनुषांगिक संगठनों की भूमिका के बारे में पूरी दुनिया जानती है। संघ के कार्यों के कारण ही देश में धर्मांतरण में कमी आई है। आतंकवाद के खिलाफ संघ ने हमेशा से मजबूती से मुकाबला किया है। कांग्रेस के नेता जानते थे कि मुस्लिम आतंकवाद से ग्रस्त भारत की जनता भरमाने के लिए इस तरह की साजिश की जा रही है। इतना तो तय है कि कांग्रेस सरकार ने इस्लामिक आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई तेज करने की बजाय हिन्दू संगठनों को बदनाम करने की साजिश रची। इससे आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई की धार कमजोर हुई और देश में आतंकवाद पनपता रहा। मालेगांव ब्लास्ट, समझौता एक्सप्रेस ब्लास्ट, हैदराबाद का मक्का मस्जिद ब्लास्ट और अजमेर शरीफ़ दरगाह में हुए धमाकों में गिरफ्तार किए गए कई लोगों की जमानत पर रिहाई या बरी होने के बाद अब कांग्रेस के नेताओं को माफी मांगनी चाहिए। इतना ही नहीं बड़ी संख्या में बेकसूर हिन्दू नेताओं को जेलों में बन्द कर प्रताड़ित करने के लिए भी जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए। 

(लेखक भाजपा के राष्ट्रीय महामंत्री हैं और सामाजिक, आर्थिक, धार्मिक तथा राजनीतिक मुद्दों पर बेबाक राय के लिए जाने जाते हैं।)

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