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अरुण यादव की यात्रा संविधान बचाओ नहीं कुर्सी बचाओ यात्रा है: सुरेन्द्र शर्मा

2018-04-15 20:49:19 170
Sandhya Desh


शिवपुरी। भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश कार्यसमिति सदस्य सुरेन्द्रशर्मा ने काँग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष अरुण यादव द्वारा 14 अप्रैल को महू से निकाले जानी वाली"संबिधान बचाओ" यात्रा  को अरुण यादव की कुर्सी बचाओ यात्रा कहा है।
सुरेन्द्र शर्मा ने कहा कि प्रदेश में काँग्रेस अपने अस्तित्व के संकट से जूझ रही है काँग्रेस के तमाम बड़े नेता अरुण यादव को प्रदेश अध्यक्ष से हटाना चाहते हैं ।काँग्रेस हाई कमान की नजर में ख़ुद को सक्रिय दिखाने के लिये अरुण यादव इस यात्रा का आयोजन कर रहे हैं ताकि कुछ दिन और अध्यक्ष रह सकें। सुरेन्द्र शर्मा ने अरुण यादव से सवाल पूछते हुये कहा कि बाबा साहेब भीमराव रामजी जी अंबेडकर जी की जयंती पर उनके जन्म स्थान से संबिधान बचाओ यात्रा निकालने से पहले अरुण यादब बतायें के काँग्रेस ने बाबा साहेब अंबेडकर को दो दो बार लोकसभा चुनाव क्यों हराया, प्रदेश में 50 साल काँग्रेस की सरकार रही स्वयं उनके पिताजी प्रदेश के उप मुख्यमंत्री रहे फिर बाबा साहेब की जन्मस्थली पर उनका स्मारक क्यों नहीं बना। 
अरुण यादव प्रदेश की जनता को यह भी बतायें कि बाबा साहेब अंबेडकर को भारत रत्न आज़ादी के 50 साल बाद क्यो दिया गया पंडित जवाहरलाल नेहरू को 1955 में एवं श्रीमति इंदिरा गाँधी को 1971 में ही भारत रत्न दे दिया गया जबकि बाबासाहेब को 1990 में भारत रत्न दिया गया  काँग्रेस की नजर में बाबा साहेब अंबेडकर का कितना सम्मान है इससे साबित होता है। अरुण यादव प्रदेश की जनता को यह भी बतायें कि उनके सांसद एवं केंद्रीय मंत्री रहते हुये बाबा साहेब की जन्मस्थली महू के रेल्बे स्टेशन का नाम बाबासाहेब अंबेडकर नगर क्यों नहीं हुआ। रही बात संबिधान की रक्षा की तो काँग्रेस नेताओं के मुँह से संबिधान रक्षा की बात ऐसे लगती है जैसे नौ सौ चूहे खाकर बिल्ली हज को चली बैसे तो अब इस मुहाबरे का भी आधुनिक स्वरूप आ गया है लोग कहने लगे हैं कि छोले भटूरे खाकर काँग्रेस उपवास को चली।
सुरेन्द्र शर्मा ने कहा कि अरुण यादव जी को याद तो होगा कि इंदिरा गाँधी जी ने देश पर आपातकाल किसने थोपा था तब कौन से संबिधान की रक्षा हुई थी, शाहबानो प्रकरण में राजीव गाँधी सरकार द्वारा कानून बदला गया था तब कौन से संबिधान की रक्षा हुई थी,पी बी नरसिम्हाराव सरकार द्वारा मध्यप्रदेश सहित 4 राज्यों की सरकारें बर्खास्त की गई थीं तब कौन से संबिधान की रक्षा हुई थी। काँग्रेस पार्टी और उसके नेताओं द्वारा ही सबसे ज्यादा संबिधान की आत्मा को ठेस पहुंचाई गई उनके द्वारा अब "संबिधान बचाओ" की बात करना मुँह में राम बग़ल में छुरी जैसा प्रतीत होता है।

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