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एलएनआईपीई में कोचिंग, ट्रेनिंग व आॅफिसिएटिंग पर राष्ट्रीय कार्यशाला संपन्न

2018-03-26 18:11:56 403
Sandhya Desh


ग्वालियर। लक्ष्मीबाई राष्ट्रीय शारीरिक शिक्षा संस्थान में खेल प्रबंधन व कोचिंग विभाग द्वारा वाॅलीबाल, बास्केटबाॅल व जिम्नास्टिक में “कोचिंग, ट्रेनिंग व आॅफिसिएटिंग” पर आयोजित सात दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला का समापन आज संस्थान के रविंद्रनाथ टैगोर सभागार में ब्रिगेडियर कर्ण सिंह (स्टेशन कंमाडर, ग्वालियर) के मुख्य आतिथ्य में हुआ। समारोह में संस्थान के कुलपति प्रो. दिलीप कुमार डुरेहा विशिष्ट अतिथि रहें। 
समारोह में अन्य प्रमुख अतिथियों में संस्थान के कुलसचिव प्रो. विवेक पांडे, प्रो. एस. मुखर्जी (विभागाध्यक्ष, खेल प्रबंधन व कोचिंग विभाग), शैलेन रामडु (अनुदेशक, एफआईवीबी, कालाजोकी, फिनलैंड), राजनारायण पात्रो (सीनियर आफिसियल, एफआईबीए, भुवनेश्वर) आदि उपस्थित रहें। समारोह के आरंभ में मुख्य अतिथि ब्रिगेडियर कर्ण सिंह, विशिष्ट अतिथि कुलपति प्रो. दिलीप कुमार डुरेहा समेत सभी अन्य प्रमुख अतिथियों का स्वागत किया गया। समापन समारोह में अपने संबोधन में कुलसचिव प्रो. पांडे ने कहा कि इस कार्यशाला के द्वारा तीन भिन्न खेलों का स्वतंत्र आयोजन देश-विदेश से संबधित खेल विशेषज्ञों की सहायता से संस्थान में किया गया हम आशा करते हैं कि आप सभी इस कार्यशाला से लाभान्वित हुए होंगे। 
संस्थान के कुलपति प्रो. डुरेहा ने अपने संबोधन में कहा कि यदि किसी व्यक्ति को सफल होना हैं तो परिश्रम करने से घबराना नही चाहिए। हम सभी जानते हैं कि प्रत्येक समाज व क्षेत्र की अपनी समस्याएं होती हैं हमारा खेल का क्षेत्र भी इससे अछुता नही हैं। हम सभी को इसके लिए कार्य करने की आवश्यकता हैं। हम देश में खेल के ढ़ाचे व कार्य करने के तरीको में सकरात्मक बदलाव लाने के लिए युवा कार्यक्रम और खेल मंत्रालय, भारत सरकार के साथ कार्य कर रहें हैं जिससे कि प्रतिभाशाली खिलाड़ियों को समयानुसार सही मंच मिल सकें। मुख्य अतिथि ब्रिगेडियर सिंह ने सभी प्रतिभागियों को कार्यशाला को सफलतापूर्वक पूर्ण करने के लिए बधाई दी और कहा कि अब यह आप सभी का दायित्व हैं कि आपने जो ज्ञान यहां इस कार्यशाला के द्वारा अर्जित की हैं उसे अपने छात्रों, खिलाड़ियों व सहयोगियों के साथ साझा करें। 
खेलों के बारे में बोलते हुए ब्रिगेडियर सिंह ने कहा कि खेल व्यक्ति में टीम वर्क, सहयोग, समानता व नेतृत्व जैसे गुणों को मजबूत करता हैं हमारे यहां भी जवानों को खेलों में हम व्यस्त रखने का प्रयास इसीलिए करते हैं जिससे कि वह किसी भी स्थिति में अपने गु्रप के साथ खड़े रहें। खेल व सैन्य बल एक-दूसरे लिए इन कारणों से समान हैं। खेलों की एक और विशेष बात यह हैं कि खेलों के द्वारा आप व्यक्ति के चरित्र व व्यवहार का आंकलन कर सकते हैं
 

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