एलएनआईपीई में राष्ट्रीय कार्यशाला का समापन

2018-03-19 20:10:23 132
Sandhya Desh


ग्वालियर। लक्ष्मीबाई राष्ट्रीय शारीरिक शिक्षा संस्थान में आज स्वास्थ शिक्षा विभाग द्वारा “खेल फिजियोथेरेपी की नवीन प्रवृत्ति” विषय पर आयोजित सात दिवसीय कार्यशाला का समापन  दिलीप कुमार डुरेहा (कुलपति, एलएनआईपीई) के मुख्य आतिथ्य में हुआ।
समारोह के विशिष्ट अतिथि प्रो. विवेक पांडे रहें। समारोह में न्यूजीलैंड से कार्यशाला के लिए पधारीं श्रीमती वैशाली थमन (खेल फिजियोथेरेपिस्ट), प्रो. एल.एन. सरकार (विभागाध्यक्ष, स्वास्थ शिक्षा विभाग), डाॅ. वी.डी. बिंदल (आयोजन सचिव) भी अन्य प्रमुख अतिथियों में शामिल रहें। समारोह के आरंभ में सभी अतिथियों का स्वागत किया गया जिसके उपरांत संस्थान के कुलपति प्रो. दिलीप कुमार डुरेहा का संबोधन हुआ। कुलपति प्रो. डुरेहा ने अपने संबोधन में डाॅ. बिंदल व उनकी टीम को मसाॅज व फिजियोथेरेपी पर क्रमानुसार दो कार्यशालाओं के सफल आयोजन के लिए बधाई दी और कहा कि हम भविष्य में भी ऐसे कार्यशालाओं का आयोजन करेंगे। हम इन कार्यशालाओं को भविष्य में और भी व्यवहारिक तौर पर आयोजित करने का प्रयास करेंगे। हम फिजियोथेरेपी में एक कोर्स को चलाने की योजना भी बना रहे हैं।
उल्लेखनीय हैं इस सात दिवसीय कार्यशाला में देश-विदेश से कई फिजियोथेरेपी विशेषज्ञों व प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया व फिजियोथेरेपी के क्षेत्र के नवीन प्रवृतियों पर चर्चा की। कार्यशाला के दौरान प्रतिभागियों को कंधे, घुटने, कमर इत्यादि चोटों के बारे में व उनके उपचारों के बारे में विस्तार से जानकारी मिली। कार्यशाला के द्वारा प्रतिभागियों ने जाना कि चोट से बचना ही सर्वाेत्तम हैं व चोटिल होने पर प्राथमिक उपचार क्या व कैसे करना हैं। विशेषज्ञों ने कार्यशाला के दौरान भारतीय परिदृश्य में खिलाड़ियों के गैर जिम्मेदाराना व्यवहार जैसेे चोटिल होने के बावजूद आराम न करना, दर्द निवारक दवाओं का उपयोग कर मैच प्रेक्टिस करना जैसे विषयों पर चर्चा की और कहा कि ऐसे खिलाड़ी अप्रत्यक्ष तौर पर अपने खेल करियर का अंत स्वयं ही कर लेते हैं।
विशेषज्ञों ने कहा कि खिलाड़ियों को चोटिल होने पर अपने चोट के उपचार के साथ ही आराम पर विशेष ध्यान देना चाहिए। विदेशों में खिलाड़ी चोटिल होने पर उपचार के साथ पर्याप्त आराम करते हैं और ट्रेनिंग को विशेषज्ञों के निरीक्षण में ही करते हैं। इस तरह वह शीघ्र ही फिट होकर मैदान में वापसी करते हैं। विशेषज्ञों ने इस सात दिवसीय कार्यशाला के दौरान हाॅट, कोल्ड, टेपिंग, हाइडो, वाॅटर, वैक्स इत्यादि थेरेपी के बारे में व इनके प्रयोग के बारे में प्रतिभागियों को विस्तार से बताया।  

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