संभाग आयुक्त ने किया दुग्ध संघ संयंत्र का औचक निरीक्षण

2018-03-14 19:19:56 106
Sandhya Desh


* दुग्ध संघ के उत्पादों की बिक्री बढ़ाने की समयबद्ध कार्ययोजना बनाने के दिए निर्देश 
ग्वालियर। ग्वालियर सहकारी दुग्ध संघ के हर उत्पाद की बिक्री बढ़ाने के लिये समयबद्ध कार्ययोजना (मार्केटिंग प्लान) तैयार करें। विभिन्न संस्थाओं एवं दुग्ध क्रेताओं से वसूली में तेजी लाएँ। साथ ही नये साँची पॉर्लर भी खोले जाएँ, जिससे दुग्ध संघ की वित्तीय स्थिति मजबूत हो। यह निर्देश संभाग आयुक्त बी एम शर्मा ने दुग्ध संघ के अधिकारियों को दिए। शर्मा बुधवार को बामौर स्थित ग्वालियर सहकारी दुग्ध संघ संयंत्र का औचक निरीक्षण करने पहुँचे थे। उन्होंने दुग्ध सहकारी समितियों व दुग्ध संघ की आर्थिक मजबूती के साथ – साथ उपभोक्ताओं को उच्च गुणवत्ता युक्त उत्पाद मुहैया कराने पर विशेष जोर दिया। 
मालूम हो संभाग आयुक्त एवं प्राधिकृत अधिकारी ग्वालियर दुग्ध संघ बी एम शर्मा की पहल पर किए गए प्रयासों की बदौलत इस साल दुग्ध संघ की आय में इजाफा हुआ है। फलत: अप्रैल 2017 से गत जनवरी 2018 की स्थिति में ग्वालियर दुग्ध संघ डेढ़ करोड़ रूपए से अधिक लाभ में आ गया है। पिछले साल इस अवधि में दुग्ध संघ 73 लाख रूपए के घाटे में रहा था। संभाग आयुक्त ने पिछले वर्षों के घाटे को दूर करने के लिये भी विशेष कार्ययोजना बनाने के निर्देश दुग्ध संघ के अधिकारियों को दिए हैं। ग्वालियर दुग्ध संघ के कार्य क्षेत्र में ग्वालियर चंबल संभाग के 6 जिलों की 750 दुग्ध समितियाँ जुड़ी हैं। दुग्ध संघ के अंतर्गत 9 दुग्ध शीत केन्द्र (बल्क मिल्क कूलर) संचालित हैं।  संभाग आयुक्त ने दुग्ध संघ संयंत्र में भ्रमण कर डेयरी डॉक, संसाधन कक्ष, पैकिंग सेक्टर, रेफ्रिजरेशन आदि सेक्टर का जायजा लिया। साथ ही इस संयंत्र में निर्मित हो रहे साँची ब्राण्ड के विभिन्न प्रकार के दूध एवं दुग्ध उत्पाद मसलन घी, मक्खन, श्रीखण्ड, दुग्ध पाउडर, लस्सी, पनीर, दही, पेड़ा आदि के निर्माण एवं पैकेजिंग प्रक्रिया का बारीकी से जायजा लिया। साथ ही मध्यान्ह भोजन के लिये तैयार किए जा रहे विशेष दूध पैकेट निर्माण का भी जायजा लिया। 
उन्होंने सेंट्रल लैब व क्लालिटी कंट्रोल सिस्टम की बारीकियाँ भी व्यवहारिक रूप से समझीं। संभाग आयुक्त ने निरीक्षण के बाद दुग्ध संघ के अधिकारियों की बैठक भी ली। उन्होंने दुग्ध संघ के सीईओ से ऐसे बकायादारों की सूची माँगी है, जिन पर दुग्ध संघ की एक लाख रूपए से अधिक राशि बकाया है। श्री शर्मा ने निर्देश दिए कि दुग्ध संघ के उन अधिकारियों को कारण बताओ नोटिस जारी करें, जिनके कार्यकाल में सिक्योरिटी राशि से अधिक लागत के दुग्ध उत्पाद बेचे गए और वसूली पर कोई ध्यान नहीं दिया। संभाग आयुक्त ने ग्वालियर शहर में साँची ब्राण्ड के नए पॉर्लर खोलने के लिये जल्द से जल्द स्थल आवंटन करने के निर्देश दूरभाष के जरिए अपर आयुक्त नगर निगम को दिए। इस अवसर पर दुग्ध संघ के सीईओ के के सक्सेना व प्रबंधक समन्वय के पी विजयवर्गीय सहित अन्य संबंधित अधिकारी मौजदू थे। 

लेबोरेटरी में अपने सामने कराई विभिन्न सेम्पल की जाँच 
संभाग आयुक्त बी एम शर्मा ने दुग्ध संघ के उत्पादों की गुणवत्ता का सही – सही पता लगाने के मकसद से विभिन्न दुग्ध उत्पादों की अपने समक्ष लेबोरेटरी में जाँच कराई। उन्होंने खासतौर पर स्टेण्डर्ड मिल्क, डीसीएस मिल्क व स्कीम मिल्क इत्यादि की थैली रेण्डम रूप से निकालकर उनकी फेट की जाँच कराई। जाँच में ये सभी उत्पाद मानकों पर खरे उतरे। 

एक दर्जन से अधिक क्वालिटी जाँच 
ग्वालियर दुग्ध संघ संयंत्र में दुग्ध एवं दुग्ध से बने उत्पादों की क्वालिटी कंट्रोल के लिये एक दर्जन से अधिक प्रयोगशाला जाँच की जाती हैं। पूरी तरह संतुष्टि के बाद ही दूध की थैली सहित अन्य उत्पाद बिक्री के लिये भेजे जाते हैं। दूध के बैक्टीरिया समाप्त करने के लिये पाश्चरीकृत प्रक्रिया अपनाई जाती है, जिसके तहत दूध को पहले 70 डिग्री सेल्सियस तापमान पर गर्म किया जाता है। फिर धीरे – धीरे डंडा करते हुए 4 डिग्री तापमान में ले जाया जाता है, जिससे सभी प्रकार के बैक्टीरिया पूरी तरह समाप्त  हो जाते हैं। 

हर रोज 45 से 50 हजार लिटर दूध संग्रहण 
बामोर स्थित ग्वालियर दुग्ध संघ संयंत्र में वर्तमान में हर दिन औसतन लगभग 45 से 50 हजार लिटर दूध का संग्रहण हो रहा है। वर्ष 2003 से पहले मात्र 25 हजार लिटर दूध का संग्रहण प्रतिदिन होता था। वर्तमान में संग्रहीत हो रहे औसतन 45 हजार दूध में से 28 हजार लिटर पाश्चरीकृत दूध विक्रय किया जाता है। शेष दूध से घी, श्रीखण्ड, पेड़ा, मक्खन, दुग्ध पाउडर, लस्सी, मावा इत्यादि तैयार कर बेचे जाते हैं। दुग्ध संघ के उत्पादों में साँची ब्राण्ड के दूध में एफसीएम मिल्क (न्यूनतम 6 प्रतिशत फेट), स्टेण्डर्ड मिल्क (न्यूनतम 4.5 प्रतिशत फेट), टोण्ड मिल्क (न्यूनतम 3 प्रतिशत फेट), डबल टोण्ड मिल्क (न्यूनतम 1.5 प्रतिशत फेट) व स्कीम मिल्क (अधिकतम 0.5 प्रतिशत फेट) प्रमुख हैं। 

Latest Updates