राकेश की आँख को फिर से मिलेगी पलक की छाँव

2018-03-13 18:13:11 76
Sandhya Desh


(हितेन्द्र सिंह भदौरिया )
दिहाड़ी श्रमिक राकेश को उसी आँख से फिर से दिखाई देने लगा, जिस आँख की रोशनी एक दुर्घटना में लगभग चली गई थी। सरकार से मिली आर्थिक मदद से चले नियमित इलाज से उनकी आँख की रोशनी तो लौट आई, मगर आँख का पलक नहीं लग पाया। प्रदेश सरकार की दीनदयाल अंत्योदय उपचार योजना से उन्हें इलाज के लिये पहले ही मदद मिल चुकी थी। अब कहीं से आसरा दिखाई नहीं दे रहा था। ऐसे में प्रदेश सरकार द्वारा चलाई जा रही “जन-सुनवाई” ने उन्हें फिर से सहारा दिया है। 
ग्वालियर जिले की डबरा तहसील के ग्राम बहादुरपुर निवासी राकेश कुशवाह कुछ वर्ष पूर्व ट्रैक्टर दुर्घटना में घायल हो गए। इस दुर्घटना में उनकी आँख को गहरी चोट पहुँची और उसका पलक भी कटकर गिर गया। आँख की रोशनी जाती रही। छ: भाईयों के श्रमिक परिवार के सबसे छोटे सदस्य राकेश का इलाज दीनदयाल अंत्योदय उपचार योजना के तहत भोपाल के हमीदिया अस्पताल में चला। वहाँ सरकार के खर्चे पर हुए ऑपरेशन से उनकी आँख की रोशनी लौट आई। पर आँख की पलक न होने से वे बगैर चश्मे के पल भी नहीं रह पाते। इससे उन्हें बड़ी तकलीफ होती। चिंता में घिरे राकेश सोचा करते कि सरकार से तो मदद मिल चुकी है, अब कहाँ जाएँ। 
राकेश ने ग्वालियर के रतन ज्योति नेत्रालय में अपनी आँख की जाँच कराई। डॉ. ने बताया कि उनके आँख में पलक लगाया जाना संभव है। मगर इस ऑपरेशन पर लगभग 35 हजार रूपए का खर्चा आयेगा। इतनी बड़ी रकम का इंतजाम एक बीमार श्रमिक की सामर्थ्य से बाहर था। उन्हंख राज्य बीमारी सहायता योजना के तहत भी आर्थिक मदद नहीं मिल पा रही थी। इसकी वजह थी उनका यह ऑपरेशन राज्य बीमारी सहायता निधि में चिन्हित बीमारियों में शामिल नहीं था। 
जब कहीं से आस दिखाई नहीं दी तो राकेश बड़ी उम्मीद के साथ कलेक्ट्रेट की जन-सुनवाई में पहुंच गए। उन्होंने कलेक्टर श्री राहुल जैन को अपनी व्यथा सुनाते हुए कहा कि धन के अभाव की वजह से उनकी आँख का ऑपरेशन नहीं हो पा रहा है। अगर 35 हजार रूपए का इंतजाम हो जाए तो रतन ज्योति नेत्रालय में वे ऑपरेशन करा सकेंगे और उनकी आँख फिर से सामान्य जैसी हो जायेगी। कलेक्टर ने उनके कागजात देखे और रतन ज्योति नेत्रालय से टेलीफोन पर संपर्क कर राकेश के इलाज में रियायत का आग्रह किया। रतन ज्योति नेत्रालय ने कुल खर्चे में से 15 हजार रूपए कम कर दिए तो कलेक्टर ने रेडक्रॉस से शेष 20 हजार रूपए का चैक राकेश को सौंप दिया। 
राकेश का तो खुशी का ठिकाना नहीं रहा। उनकी आँखें खुशी से छलक आईं। अभी तक अविवाहित राकेश कहते हैं कि अब जल्द ही उनके सिर पर सेहरा सजेगा। कलेक्ट्रेट की सीढ़ियाँ उतरते हुए वे कहे जा रहे थे कि मध्यप्रदेश में सच में लोक कल्याणकारी सरकार काबिज है जिसने जरूरतमंदों की मदद के लिये एक नहीं अनेक खिड़कियाँ खोल रखी हैं। (मोबा. नं. राकेश – 9131914508)
 

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