फूलों की किस्मों के साथ उनके सजावट के तरीकों का भी प्रदर्शन

2018-02-22 18:10:21 120
Sandhya Desh


ग्वालियर। बदलते परिवेश में उद्यानिकी फसलें समय की आवश्यकता हैं।  इन्हें उगाकर गांव के किसान आमदनी बढ़ा सकते हैं तो शहर में इनसे साज सज्जा एवं परीरक्षित पदार्थों की इकाई चलाने वाले लोग रोजगार पाते हैं। ये फसलें आमदनी, साज सज्जा व सुंदरता के साथ समाज की स्वास्थ्य जरुरत पूरी करती हैं।
फल-फूल, शाक-सब्जी एवं परिरक्षित पदार्थाें की दो दिवसीय प्रदर्शनी एक साथ इन सभी उददेश्यों को पूरा करती है।  कृषि विश्वविद्यालय को इस तरह की प्रदर्शनियों का निरंतर आयोजन कर उद्यानिकी फसलों को इसी लक्ष्य के साथ बढ़ावा देना चाहिए। आज कृषि विश्वविद्यालय में फल-फूल, शाक-सब्जी एवं परिरक्षित पदार्थाें की दो दिवसीय प्रदर्शनी का फीता काटकर शुभारंभ करते हुए यह बात राजा मानसिंह तोमर संगीत विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. लवली शर्मा ने कही। उन्होंने प्रदर्शनी का राजमाता विजयाराजे सिंधिया कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. एस. के. राव के साथ भ्रमण किया एवं प्रदर्शनी में रखीं फल फूल शाक सब्जी की विभिन्न किस्मों के बारे में जानकारी प्राप्त की। 
इस अवसर पर कुलपति प्रो. राव ने बताया कि इस प्रदर्शनी का उद्देश्य बागवानी फसलों के प्रति किसानों के साथ समाज में भी जागरुकता लाना है। इस तरह की प्रदर्शनियां विश्वविद्यालय अंतर्गत प्रत्येक जिले में आयोजित करते हुए वहां की किस्मों का व्यापक प्रचार प्रसार किया जाएगा। इससे किसानों की आमदनी दुगुनी होने के साथ उद्यानिकी के जरिये रोजगार को बढ़ावा मिलेगा। 

महिलाओं और युवाओं ने की प्रतिस्पर्धा
इस प्रदर्शनी में 12 श्रेणियों में विभिन्न प्रतियोगिताएं आयोजित हुईं। इनमें प्राकृतिक लैण्डस्केप, रोक बोनसाई, मीडियम बोनसाई, गमलों में सजावटी पौधे, गमलों में फल एवं सब्जियां, मौसमी पुष्पों की टहनियां, कट फलाॅवर में गुलाब, कट फलाॅवर में अन्य, पुष्पसजा फ्री स्टाइल में, पुष्पसज्जा, पुष्पगुच्छ, पुष्पांजलि, गजरा, फल एवं शाक सब्जियां वर्ग शामिल हैं।

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