शिव का सन्देश देने निकली शोभायात्रा

2018-02-12 20:01:10 37
Sandhya Desh


ग्वालियर |  प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय लश्कर ग्वालियर द्वारा आज भव्य शोभा यात्रा निकाली गई यह शोभायात्रा सनातन धर्म मंदिर से प्रारम्भ हुई यात्रा को झंडी अचलेश्वर मंदिर के पदाधिकारियों (हरिदास अग्रवाल, भुवनेश्वर बाजपाई,नरेन्द्र सिंघल, रामनाथ अग्रवाल, विजय कब्जू आदि) द्वारा दिखाई गई|
इस शोभा यात्रा में परमात्मा शिव भोलेनाथ के साथ साथ भगवान श्री कृष्ण एवं श्री राम की चैतन्य मनमोहक झांकी भी लगाई गई, यह यात्रा पाटनकर चोराहा, गस्त का ताजिया, हनुमान चौराहा, जनक गंज, महाराज बाड़ा, होती हुई माधोगंज ब्रह्माकुमारीज सेंटर पर पहुँची | जिसका जगह जगह पर भव्य स्वागत भी किया गया  ब्रह्माकुमारीज केंद्र पर पहुंचकर बिभिन्न धर्मगुरुओं द्वारा शिव ध्वजारोहण किया गया एवं अमरनाथ की झांकी का शुभारंभ भी हुआ | धर्मगुरुओं में संत कृपाल सिंह महाराज, फादर विन्सेंट (फालका बाजार चर्च), काजी हाफिज हसमत अली (गोहद), जमील खान(कम्पू), भतन्ते श्रदातिस्त (बोद्ध विहार), श्री डी.पी. लवानिया (गायत्री परिवार), ब्रह्माकुमारी आदर्श बहन जी(सेवाकेंद्र इंचार्ज), बी.के. प्रह्लाद आदि | कार्यक्रम में सभी ने अपनी शुभकामनायें व्यक्त की|
ब्रह्माकुमारी आदर्श बहन जी ने सभी धर्म गुरुओं का शव्दों के द्वारा स्वागत किया एवं शिवरात्रि का आध्यत्मिक रहस्य बताते हुए कहा कि भारतवासी हर वर्ष शिवरात्रि मनाते है किन्तु इस सत्यता को सभी भूल चुके है कि यह भारत का सबसे बड़ा त्यौहार है “शिवरात्रि” का अर्थ है कि परमात्मा इस कलियुग रूपी अज्ञान अँधेरी रात में सृष्टि पर अवतरित होकर मनुष्यों को पांच विकारों (काम, क्रोध, लोभ, मोह, अहंकार) से छुड़ा देते है उसी का यादगार शिवलिंग पर भांग, अक, धतूरा चढ़ाना है | भारत में शिव की प्रतिमा शिवलिंग अनेक मंदिरों में है इनमे मुख्य अमरनाथ, सोमनाथ, विश्वेश्वर, पापकटेश्वर , मुक्तेश्वर, महाकालेश्वर  इत्यादि नाम प्रसिद्द है | ये परमात्मा के सभी नाम किसी न किसी गुण अथवा दिव्य कर्तव्य के सूचक है दक्षिण में रामेश्वर, वृन्दावन में गोपेश्वर के मंदिर भी प्रमाणित करते है कि शिव ही श्रीराम व् श्रीकृष्ण के परम पूज्य परमात्मा है शिवलिंग का कोई शारीरिक रूप नहीं है क्योकि यह परमात्मा का ही स्मरण चिन्ह है परमात्मा भी निराकार ज्योति स्वरुप है | आज अधिकांश लोग लिंग शव्द का अर्थ न जानने के कारण लिंग के वारे में अश्लील कल्पना करते है |वास्तव में परमात्मा शिव के ज्योति स्वरूप होने के कारण ही उनकी प्रतिमा को ज्योतिर्लिंग अथवा शिवलिंग कहा जाता है |
शिव की मान्यता विश्व व्यापी है अन्य धर्मों के लोग भी परमात्मा शिव की इस प्रतिमा को अपनी अपनी रीति के अनुसार मान्यता देते है | मक्का में यह स्मरण चिन्ह “संग-ए-असवद” नाम से विख्यात है | जापान के बहुत से बौद्ध धर्मावलम्बी आज भी शिवलिंग के आकार के पत्थर को सामने रखकर ध्यान लगाते है | ईसा ने परमात्मा को “दिव्य ज्योति” कहा है | इटली तथा फ्रांस के गिरिजाघरो में अभी तक शिवलिंग की प्रतिमा रखी है | रोम में शिवलिंग को “प्रियपस” कहते है शंकराचार्य ने भी शिवलिंग के मठ स्थापित किये | श्री गुरुनानक देव ने भी परमात्मा को “ओंकार” कहा है  जबकि ज्योतिस्वरुप शिव परमात्मा के एक मंदिर का नाम भी “ओंकारेश्वर” है  श्री गुरु गोविन्द सिंह जी के “दे शिवा वर मोहे” शव्द भी उनके परमात्मा शिव से वरदान मांगने की याद दिलाते है इससे स्पष्ट ही कि परमात्मा शिव एक धर्म के पूज्य नहीं वल्कि विश्व की सभी आत्माओं के परमपूज्य परमपिता है |
अब परमात्मा शिव शंदेश देते है – मेरे प्रिय भक्तो , आप जन्म जन्मान्तर से बिना यथार्थ पहचान के मेरी जड़ प्रतिमा की पूजा, जागरण तथा उपवास करके शिवरात्रि मनाते आये हो | अब अपने इस अंतिम जन्म में महाविनाश से पूर्व मेरे ज्ञान द्वारा अज्ञान निद्रा से जागरण कर मेरे साथ मनमनाभव अर्थात योग युक्त होकर विकारों का सच्चा उपवास करो |इस ज्ञान और योगबल से महाविनाश तक ब्रह्मचर्यं व्रत का पालन करो | यही सच्चा महाव्रत अथवा शिव व्रत है | अब अति धर्म ग्लानी का समय पुनः आ चुका है और पवित्र पावन परमात्मा शिव ब्रह्मा के साकार तन में प्रवेश करके अपना कल्प (5000) वर्ष पूर्व वाला रूद्र गीता ज्ञान सुना रहे है | इस शिवरात्रि को हम उनके दिव्य अवतरण की 82 वी जयंती मना रहे है | सभी मनुष्य आत्माओं को सादर ईश्वरीय निमंत्रण है कि शिवरात्रि के यथार्त अध्यात्मिक रहस्य को जानकार शीघ्र ही आने वाली सतयुगी नई दुनिया में देवपद को प्राप्त करें |

तत्पश्चात फालका बाजार चर्च से फादर विन्सेंट ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि ईश्वर ही सबका सृजनहार है वही जीवन देता है और वही लेता है और हम इस संसार में थोड़े समय की यात्रा है इसमें सुख भी है तो दुःख भी है इन सबको लेते हुए हमारा सम्बन्ध ईश्वर से और एक दुसरे से भी अच्छे  सम्बन्ध बनाये रखना यह भी एक तपस्या है इसके लिए ईश्वर हमें सद्गुणों से भरा है ईश्वरीय गुणों के द्वारा हम समाज में भाईचारा बनाकर रखे यही आज के इस अवसर पर हमारी शुभ कामना है
मुस्लिमधर्म से पधारे सम्म्नीय काजी हाफिज हसमत अली ने अपनी शुभकामनायें देते हुए कहा कि अल्लाह एक है ईश्वर एक है उसी ने हम सबको पैदा किया हम सब एक की ओलाद है इसी मिटटी में जन्मे और इसी मिटटी में मिलना है कुरान में लिखा है कि हमने तुम्हे एक वेहतरीन सांचे में ढाला है मगर तुम में बेहतर वह है जो लोगो के साथ अच्छा वर्ताव करे इन्शानियत को सर्वोपरी रखे अगर व्यक्ति अपनी इन्शानियत छोड़ देगा तो वह सबसे खतरनाक हो जायेगा | मोहमद साहब ने कहा है कि आपका पडोसी भूखा है और आप मजे से पेट भर खाना खाते हो तो वह सच्चा मुसलमान नहीं है हमारी जिम्मेवारी है इन्शानियत के लिए जिए और मरे वह किसी भी धर्म का या किसी भी मजहब का हो वह हमारा बहन अथवा भाई है   
गायत्री परिवार से डी. पी. लवानिया ने कहा कि आज बच्चो को भी आध्यात्मिक शिक्षा की आवश्यकता कि इसकी जिम्मेवारी माता पिता पर है माता पिता जब इसका गहराई से अनुशरण करेंगे तो उसका असर बच्चो पर भी पढ़ेगा यह कहते हुए उनोहने सभी को महाशिवरात्रि की शुभकामनायें सभी को दीं |संत करपाल सिंह महाराज ने कहा कि सर्वोपरी शक्ति एक जिसे हम अलग अलग नामों से पुकारते है जो सबका मालिक, सद्गुरु, ईश्वर, अल्लाह व् पिता है अगर जिसने मानव सेवा का भाव पैदा कर लिया और एक दुसरे के दुःख को समझा तो न कुछ करते हुए भी ईश्वर की कृपा का पात्र बन गया | इसी के साथ ही सभी को शिवरात्री के महाव\पर्व की सभी को शुभकामनायें दीं कार्यक्रम के अंत में बी. के. प्रह्लाद ने सभी का आभार व्यक्त किया | इस अवसर पर संस्थान से बी.के. ज्योति बहन, बी.के. डॉ. गुरचरण, बी.के. जीतू  आदि उपस्थित थे  |

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