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10 प्राचीन महल, किले, दुर्ग निजी हाथों में जाएंगे

2018-02-12 09:01:39 236
Sandhya Desh


भोपाल। मध्यप्रदेश की प्राचीन कला और संस्कृति के ध्योतक दस प्राचीन महल, दुर्ग और किलो को सरकार निजी हाथों में देने की तैयारी में है। मंडला का मोती महल, टीकमगढ़ का बल्देवगढ़ किला और शिवपुरी के नरवर दुर्ग सहित ऐसे दस प्राचीन राज्य संरक्षित स्मारकों को हेरीटेज होटल में तब्दील किया जाएगा।
मुख्य सचिव बसंत प्रताप सिंह की अध्यक्षता में हुई बैठक में प्रदेश के प्राचीन स्मारकों को निजी हाथों में देने का निर्णय लिया गया था। उसके बाद यह कवायद की जा रही है। संस्कृति विभाग ने इन सभी स्मारकों को राज्य संरक्षित स्मारकों की सूची से बाहर कर दिया है। राज्य सरकार पहले इन स्मारकों का स्वामित्व मध्यप्रदेश पर्यटन विभाग को सौपेगी। इसके बाद पर्यटन विभाग इन प्राचीन स्मारकों को हेरीटेज होटल में तब्दील करने निजी निवेशकों को आमंत्रित करेगा। इन प्राचीन स्मारकों को हेरीटेज में बदलने और उसके संचालन, संधारण की जिम्मेदारी निजी निवेशकों को दी जाएगी। बदले में राज्य सरकार इन निवेशकों से मोटी रकम लेगी। इन प्राचीन स्मारकों को हेरीटेज होटल्स में तब्दील कर यहां आने वाले देशी-विदेशी पर्यटकों को यहां ठहरने की व्यवस्था की जाएगी।
प्रमुख सचिव पर्यटन हरिरंजन राव ने कहा कि प्रदेश के दस प्राचीन किले, महल, दुर्ग हेरीटेज होटल में तब्दील किए जाएंगे। इसके लिए निजी निवेशकों को आमंत्रित किया जाएगा।

हेरिटेज होटल में तब्दील होंगे ये स्मारक
गुना जिले के बजरंगगढ़ किले को राज्य संरक्षित स्मारक घोषित किया है। रीवा जिले प्राचीन क्योटी के किले को राज्य सरकार ने अपने संरक्षण में लेकर इसका जीर्णोद्धार किया था। कटनी जिले का विजयराघवगढ़ किला सरकार अपने संरक्षण में ले चुकी है। मंडला के मोती महल राज्य द्वारा संरक्षित किया है। शिवपुरी में 7.724 हेक्टेयर में फैला नरवर दुर्ग 86 से, धार जिले का प्राचीन किला सराय तालाब, जबलपुर में रॉयल होटल, पुराना बंगला मय अहाता, टीकमगढ़ में किला बल्देवगढ़, श्योपुर में नरसिंह महल, किला श्योपुर राज्य सरकार के पास है।

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