एलएनआईपीई में पोषण, व्यायाम व वजन प्रबंधन पर राष्ट्रीय कार्यशाला शुरू

2018-02-05 17:48:01 46
Sandhya Desh


ग्वालियर। लक्ष्मीबाई राष्ट्रीय शारीरिक शिक्षा संस्थान के खेल प्रबंधन व कोचिंग विभाग द्वारा आयोजित पोषण, व्यायाम व वजन प्रबंधन पर राष्ट्रीय कार्यशाला का शुभारंभ आज डाॅ. डी.के दुबे (निदेशक, डी.आर.डी.ई, ग्वालियर) के मुख्य आतिथ्य मंे हुआ। विशिष्ट अतिथि प्रो. जे.पी वर्मा (प्रभारी कुलपति, एलएनआईपीई, ग्वालियर) रहें। 
समारोह का शुभांरभ मां सरस्वती की प्रतिमा पर दीप प्रजवलन के साथ हुआ। इसके उपरांत मुख्य अतिथि डाॅ. दुबे, विशिष्ट अतिथि प्रभारी कुलपति प्रो. वर्मा, मुख्य वक्ता मिस नेन्सी क्लार्क (स्पोट्र्स न्युट्रिशन एक्सपर्ट, यु.एस.ए) व डाॅ. वाई. वेकेंटरमन (हेड, डिपार्टमेंट आॅफ वर्क फिजीयोलाॅजी एण्ड स्पोट्र्स न्यूट्रिशन, आई.सी.एम.आर, हैदराबाद) का स्वागत किया गया। सभी अतिथियों के स्वागत उपरांत प्रभारी कुलपति प्रो. वर्मा का संबोधन हुआ। अपने संबोधन में कुलपति प्रो. वर्मा ने सभी का स्वागत करते हुए कहा कि इस कार्यशाला का विषय आज के समय की आवश्यक्ता हैं क्योंकि डब्लू.एच.ओ के रिपोर्ट के अनुसार विश्व में लगभग 2 मिलियन लोग ऐसे हैं जो कि विटामिन ए व आयरन की कमी से ग्रसित है। लगभग 2 बिलियन लोग ऐसे हैं जो मोटापे से ग्रसित हैं इनमें ज्यादातर युवा पीढ़ी के बच्चे हैं। यह हम सभी के लिए एक सर्तकता संकेत हैं कि हम सभी इन विषयों पर जागरूक हो और अपना और अपने आने वाली पीढ़ी को स्वस्थ रखने में एक-दूसरे की सहायता करें। हम सभी को डब्लु.एच.ओ की स्वस्थ रहने की गाइडलाइन का अनुपालन करना चाहिए जैसे कि नवशिशु को मां का दूध, अपने आहार में विभिन्न सब्जियों, फलों व अनाजों को शामिल करना व नमक व शक्कर का न्यूनतम मात्रा का बनाए रखना इत्यादि पर ध्यान देना चाहिए। 
प्रो. वर्मा ने कहा कि मुझे आशा हैं आने वाले 4-5 दिनों में मैडम क्लार्क, डाॅ. वेंकेटरमन और अन्य विशेषज्ञ वक्ता इस कार्यशाला के माध्यम से आप सभी प्रतिभागियांे का इस विषय से जुड़ी समस्याओं व समाधानों से आपको अवगत कराएंगे। मैं प्रो. मुखर्जी व उनकी टीम को कार्यशाला के आयोजन के लिए विशेषतः बधाई देता हुं। आप सभी को कार्यशाला के लिए मेरी शुभकामनाएं। प्रभारी कुलपति प्रो. वर्मा के उपरांत मुख्य अतिथि डाॅ. दुबे का संबोधन हुआ। अपने संबोधन में डाॅ. दुबे ने कहा कि यह मेरे लिए सम्मान का विषय हैं मुझे आज इस गौरवशाली संस्थान में आने का अवसर मिला मैं प्रभारी कुलपति प्रो. वर्मा व एलएनआईपीई प्रशासन को धन्यवाद करता हुं। हमारा शरीर प्रकृति के एक उत्कृष्ट रासायनिक संतुलन का उदाहरण हैं। हम अपने दैनिक कार्याे के लिए भौतिक गतिविधि करते हैं यहीं पर न्युट्रिशन व फिजियोलाॅजी का कार्य आंरभ होता हैं। शरीर के रासायनिक संतुलन व भौतिक गतिविधि के लिए आवश्यक ऊर्जा उत्पन्न व उसका सामंजस्य बनाए रखने का। आप सभी प्रतिभागियों के लिए सुनहरा अवसर हैं कि आपके समक्ष इन विषयों के राष्ट्रीय व अंर्तराष्ट्रीय विशेषज्ञ उपस्थित हैं। आप सभी इस कार्यशाला को अच्छे से पूर्ण करें और अधिकतम ज्ञान अर्जित करने का प्रयास करें। अंत में डाॅ. आशीष फुलकर ने धन्यवाद प्रस्ताव प्रेषित किया। 
शुभांरभ समारोह के उपरांत आज का पहला व्याख्यान डाॅ. वेंकेटरमन ने लिया जिसमें स्पोटर्स न्युट्रिशन की आवश्यक्ता व भारतीय खेलों पर इसके प्रभाव पर चर्चा की गई। अपने व्याख्यान में डाॅ. वेंकेटरमन ने प्रतिभागियों को बताया कि क्या प्रमुख चीजें हैं जो कि एक खिलाड़ी को बनाती हैं। इसमें अनुवांशिकी, सुविधाएं, पोषण, जांच, प्रतिभा पहचान, सीखने की काबिलियत, दृढ़-संकल्पता व वैज्ञानिक सहयोग जैसे महत्वपूर्ण बिन्दूओं पर चर्चा की गई। डाॅ. वेंकेटरमन ने अंर्तराष्ट्रीय खेलों जैसे साउथ-ऐशियन गेम्स, काॅम्नवेल्थ व ओलम्पिक के माध्यम से प्रतिभागियों को बताया कि हमारे देश का स्थान कहां हैं और हमारे कमजोर प्रदर्शन के लिए एक पिरामिड आकृति के माध्यम से स्पष्ट किया कि भारत में केवल 10 प्रतिशत लोग खेलते हैं जबकि जो देश खेलों में अच्छा कर रहें वहां कि 80 प्रतिशत आबादी किसी न किसी खेल गतिविधि में सक्रिय है। 
डाॅ. वेंकटरमन ने आगे कहा कि हर खेल व हर खिलाड़ियों की आवश्यक्ताएं अलग होती हैं। खेलों के आधार पर व्यक्ति का भार व लंबाई की अलग आवश्यक्ताएं तो हैं ही साथ उन खेलों में निश्चित स्थानों की आवश्यक्ता भी अलग हंै जैसे एक गोलकीपर की और आक्रमण क्रम पर खेल रहे खिलाड़ियों की। इन खिलाड़ियों की न्युटिशनल वैल्यु व डाइट भी इनके पोजिशन के अनुसार अलग-अलग होनी चाहिए। यदि खिलाड़ी दूसरे हाॅफ में भाग नही पा रहा तो इसका मतलब यह नही कि वह फिट नही बल्कि यह हैं कि उसने कार्ब की मात्रा का कम उपभोग किया हैं। डाइट के मुख्यतः तीन माइक्रोन्युट्रिएन्टस कार्ब, फैट व प्रोटिन में बदलाव कर हम खिलाड़ियों को उनके खेल के हिसाब से तैयार करते हैं अंतः उनके प्री, डयुरिंग व पोस्ट मील का सही व निर्धारित मात्रा देकर हम खिलाड़ियांे के माइक्रोन्युट्रिएन्टस कार्ब, फैट व प्रोटिन के कमी को पूरा करते हैं। डाॅ. वेंकटरमन ने स्प्रींटरर्स, फुटबाॅल, हाॅकी व बाक्सिंग के खिलाडियों के उदाहरण देकर इन सभी विषयों पर चर्चा की। 

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