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यहां 125 विधायकों को फिर टिकट दिया तो हार जाएंगे

2018-02-04 09:13:47 595
Sandhya Desh


राजस्थान में भाजपा को पहला तीन तलाक 'अलवर, अजमेर और मांडलगढ़' मिल चुका है। अब हालात चिंता से कहीं ज्यादा तनावपूर्ण हो गए हैं। राजस्थान की जनता के मूड पर किया गया सांध्यदेश डाॅट काॅम के अनुसार एक अध्ययन बताता है कि यहां की जनता अपने विधायक को दूसरा मौका नहीं देती। भजपा के पास 160 विधायक हैं, यदि सभी को वापस टिकट दे दिए गए तो केवल 28 ही जीत पाएंगे, 125 विधायक हार जाएंगे और इसी के साथ भाजपा अध्यक्ष अमित शाह का 180 प्लस का सपना भी टूट जाएगा। 
सियासी ट्रेंड दो संकेत देता है। पहला, सत्तारूढ़ दल की वापसी नहीं होती। दूसरा, चुनाव मैदान में उतरने वाले सत्तापक्ष के मौजूदा विधायकों में से महज 17 फीसदी तक ही वापस जीतते हैं। सांध्यदेश डाॅट काॅम के अनुसार  सत्ता वापसी की बात तो दूर, इस ट्रेंड के हिसाब से मुकाबले में आने के लिए ही बीजेपी के पास नए चेहरे उतारना ही एक विकल्प बचता है। सियासी जानकारों का भी यही कहना है। सत्ता पक्ष के विधायकों की एंटीइनकमबेंसी का सबसे बड़ा उदाहरण अलवर लोकसभा सीट रही।

BJP की हारी हुई 3 सीटें क्यों हैं अहम?
यहां हुए उपचुनाव में मौजूदा विधायक और कैबिनेट मंत्री जसवंत यादव बतौर प्रत्याशी इस लोकसभा सीट पर तो हारे ही, अपनी विधानसभा सीट बहरोड़ पर भी बढ़त कायम नहीं रख पाए। सांध्यदेश डाॅट काॅम के अनुसार कहने को तो ये सिर्फ तीन सीटें हैं लेकिन यह जानना भी जरूरी है कि ये सीटें आसपास के सात जिलों को सियासी तौर पर प्रभावित करती हैं। ये सात जिले प्रदेश की 200 विधानसभा सीटों का एक चौथाई हिस्सा कवर करते हैं।  

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