Recent Posts

ताका-झांकी

ग्वालियर व्यापार मेला में आयोजित कवि सम्मेलन में देश भर के कवियों ने की शिरकत

2018-01-14 17:06:00 347
Sandhya Desh

एक मीरा दीवानी तो मुझमे में भी है
मेरी कीमत आज भी उनकी पगड़ी से ज्यादा कुछ भी नहीं
ग्वालियर। पिता के संस्कारों की बारहखड़ी से ज्यादा कुछ नहीं। उनकी मुस्कराहट की घड़ी दो घड़ी से ज्यादा कुछ भी नहीं।।
मैं कितना भी कमां लूं कुछ भी बन जाऊं दुनिया में। मेरी कीमत आज भी उनकी पगड़ी से ज्यादा कुछ भी नहीं....... इन्हीं पंतियों के साथ इदौर से आए हास्य व्यंग्य के कवि अतुल ज्वाला ने अखिल भारतीय कवि सम्मेलन की शुरूआत की। 
ग्वालियर व्यापार मेला में सांस्कृतिक कार्यक्रमों की श्रृंखला में शनिवार को कला मंदिर रंगमंच पर अखिल भारतीय कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया। जहां देश भर के नामी कवियों ने शिरकत कर राष्ट्र प्रेम की भावना को जागृत करने के साथ ही मौजूद व्यवस्था पर करारी चोट करते हुए वर्तमान हालातों से परिचित कराया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि डाॅ. हरिमोहन पुरोहित थे। जबकि भाजपा नेता रामेश्वर भदौरिया विशिष्ट अतिथी थे। मेला प्राधिकरण के सचिव शैलेंद्र मिश्रा ने सभी कवियों का सम्मान किया। 
कवि सम्मेलन में हास्य व्यंग्य के कवि रायपुर के पद्मश्री डाॅ. सुरेंद्र दुबे ने मानवीय पहलुओं पर प्रकाश डालते हुए कहा,  जिस मानस को इस मानस से प्यार नहीं है, उस मानस में कहने का अधिकार नहीं है। 
गाजियाबाद से आए डाॅ. कुंवर बैचेन शानदार गजल पेश करते हुए कार्यक्रम को भव्यता प्रदान की। देखें उनकी बानगी- 
पूरी धरा भी साथ दे तो और बात है, पर तू जरा भी साथ दे तो और बात है। तुम्हारे दिल की चुभन भी जरूर कम होगी, 
किसी के पांव से कांटा तो निकाल कर तो देखो।
जयपुर के अशोक चारण ने सैनिक की तिरंगे के प्रति मनोभावना को दर्शाते और जनमानस में राष्ट्रप्रेम का भाव जागृत करते हुए कहा - 
ये जहरीला घूंट कसम से हंस कर के पी जाऊंगा। 
मेरी लाश को मिले तिरंगा मरकर भी जी जाऊंगा। 
बाराबांकी के गीतकार प्रियांशु गजेंद्र श्रृंगार रस में काव्य पाठ करते हुए कालाधान पर चोट की। देखिए उनकी प्रस्तुति - 
लौटकर के न फिर आए परदेश से, आदमी ना हुए कालाधन हो गए। 
सहारनपुर के गीतकार राजेंद्र राजन ने मानव जीवन की हकीकत को बयां करते हुए काव्य पाठ किया। 
उन्होंने कुछ इस अंदाज में अपनी बात कही- 
जिंदगी को खूबसूरत दावत कल ले जाएगी।
ये समय की धूप ही तो छांव तक ले जाएगी।।
तू चला चल इस सफर में मील के पत्थर न गिन। 
वर्ना ये आदत थकन को पांव तक ले जाएगी।।
मक्खनम मुरादाबादी और फरीदाबाद के हास्य कवि सरदार मनमीत सिंह ने अपनी रचनाओं को श्रोताओं को हंसाहंसा कर लोटपोट कर दिया। 
आगरा के व्यंग्यकार हरीश चतुर्वेदी ने आधुनिक राष्ट्रीयता पर करारा प्रहार करते हुए कहा कि- 
 भारत का राष्ट्रीय पशु बाघ, रष्ट्रीय पुष्प कमल, राष्ट्रीय पक्षी मोर तथा भारत का राष्ट्रीय आदमी चोर।
इनके बाद बारी आई इंदौर से आईं गीत-गजलकार डाॅ. भुवन मोहिनी की, उन्होंने दिल को छू लेने वाली रचना प्रस्तुत कर कार्यक्रम को भव्यता प्रदान की और जमकर वाह-वाही लूटी। 

देखिए उनकी बानगी- 
एक अधूरी कहानी तो मुझमें भी है, धड़के दिल वो जवानी तो मुझमें भी है। 
तुम जो छू लो शिवाला बनू प्रेम का, एक मीरा दीवानी तो मुझमें भी है। 
इनके बाद कार्यक्रम का संचालन कर रहे तेजनारायण शर्मा ने सियासत पर बार करते हुए कहा कि - हम सियासी नबावों के नबासे नहीं, ये सियासत हमें कब बलम बोलती है। 
जो सियासत ने सौंपी है हिकारत, उसी की हकीकत कलम बोलती है। 
इनके बाद  आगरा के हास्य व्यंग्य के कवि पवन आगरी और बदनावर के राकेश शर्मा ने भी अपनी रचनाओं के साहित्य और काव्य प्रेमियों को रोमांचित कर दिया। 



Latest Updates