ई-वे बिल पर चेम्बर में कार्यशाला आयोजित

2018-01-12 19:05:17 109
Sandhya Desh


ग्वालियर। आगामी 1 फरवरी से लागू होने जा रहे ई-वे बिल पर जागरूकता के उद्देश्य से चेम्बर भवन में आज में ई-वे बिल पर एक कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला में राज्य कर के उपायुक्त चंद्रशेखर सिंह चौहान, हरीदास मलेराव, सहायक आयुक्त अजय ओझा, सी.ए. दीपक वाजपेयी, अध्यक्ष-अरविन्द अग्रवाल, मानसेवी सचिव-डॉ. प्रवीण अग्रवाल, मानसेवी संयुक्त सचिव-जगदीश मित्तल, प्रांतीय कर उपसमिति के संयोजक-जे.सी. गोयल सहित कार्यकारिणी समिति सदस्यगण व चेम्बर सदस्यगण उपस्थित थे। 
कार्यशाला के प्रारंभ में अतिथियों का बुके देकर स्वागत किया गया। अध्यक्ष-अरविन्द अग्रवाल ने अपने स्वागत उदबोधन में कहा कि जीएसटी पर चेम्बर का नजरिया प्रारंभ से ही पॉजिटिव रहा है। हम चाहते हैं कि किसी भी सिस्टम की जानकारी आप तक पहुंचायें ताकि हम उसकी तकनीकी चीजों को समझकर कारोबार करें ताकि व्यापारियों को किसी तकनीकी विषय पर परेशान न होना पड़े। आज की कार्यशाला म्ी इसी उद्देश्य से की गई है, ताकि हम ई-वे बिल के प्रावधानों को समझकर अपने कारोबार को आसान बनायें। 
कार्यशाला में उपायुक्त, राज्यकर चंद्रशेखर सिंह चौहान ने बताया कि ई-वे बिल कैसे जनरेट होता है। इसके विषय में विस्तार से जानकारी देने के लिए कार्यशाला का आयोजन किया गया है। केन्द्र सरकार ने 1 फरवरी 2018 से पूरे राष्ट्र में इसे लागू करने का निर्णय लिया है। कर्नाटक सर्वप्रथम इस बिल को लागू करने वाला राज्य बना है। उन्होने बताया कि जीएसटी 1 जुलाई 2017 से लागू किया गया था और इसमें माल के परिवहन के लिए ई-वे बिल का प्रावधान किया गया है। एमपीजीएसटी एवं सीजीएसटी की धारा 68 के नियम 38 में ई-वे बिल की जानकारी दी गई है। 
क्या है ई-वे बिल:- ई-वे बिल एक प्रकार का फार्म है जो निगेटिव वस्तुओं की सूची को छोड़कर सभी अधिसूचित वस्तुओं पर लगेगा। 5० हजार से ज्यादा मूल्य के माल के परिवहन के लिए ई-वे बिल अनिवार्य किया गया है। आप अपने जीएसटिन नंबर द्बारा ई-वे बिल जनरेट कर सकते हैं। ई-वे बिल फार्म में दो पार्ट ए व बी होते हैं। ए पार्ट में जीएसटीटिन नंबर, माल की कीमत, एचएसएन कोड आदि जानकारी भरनी होती है। दूसरे पार्ट में मात्र व्हीकल नंबर आपको डालना होता है। यदि ई-वे बिल कंसाइनी के नाम का है तो उसकी आईडी पर भी वह दिखेगा, जिसे कंसाइनी स्वीकृत अथवा अस्वीकृत कर सकता है। इसे कंसाइनी अथवा कंसाइनर में जो म्ी पंजीकृत हो वह ई-वे बिल जारी कर सकता है। यदि कंसाइनी अथवा कंसाइनर दोनों में से कोई म्ी पंजीकृत नहीं है तो ट्रांसपोर्टर को ई-वे बिल जनरेट करना होगा। 
अजय ओझा द्बारा ई-वे बिल को जनरेट करने की जानकारी पॉवर पॉइंट प्रेजेन्टेशन द्बारा एलसीडी प्रोजेक्टर के माध्यम से दी गई। सीए-दीपक वाजपेयी द्बारा बताया गया कि माल का इलेक्ट्रोनिक मूवमेंट के लिए इसे लागू किया गया है। ई-वे बिल जनरेट करने के बाद माल की इनवॉइस तो साथ लेकर चलना ही होगी। 72 घंटों के बाद ई-वे बिल को क्लोज करना होगा। यदि आपने गलत ई-वे बिल जनरेट कर लिया है तो आप इसे कैंसिल भी कर सकते हैं। 1 फरवरी 2०18 से इंटर स्टेट ई-वे बिल लागू होगा इसके बाद 1 जून 2०18 से राज्य में ही माल के परिवहन के लिए ई-वे बिल का प्रावधान लागू किया जायेगा। 
कार्यक्रम के अंत में  राघवेन्द्र बंसल, सोनू गर्ग, संजय कुमार अग्रवाल, वसंत अग्रवाल आदि ने अपनी जिज्ञासाओं संबंधी प्रश्न किये, जिसका समाधान अधिकारीगणों द्बारा किया गया। कार्यक्रम का संचालन मानसेवी सचिव-डॉ. प्रवीण अग्रवाल एवं आमर मानसेवी संयुक्त सचिव-जगदीश मित्तल द्बारा व्यक्त किया गया। 

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