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ताका-झांकी

मोदी और शाह की दृढ़ता से ही हटा अनुच्छेद 370: शेजवलकर

13-Aug-19 18
Sandhyadesh

ग्वालियर। जम्मू-कश्मीर के लोगों में भेदभाव की प्रतीक 370 और 35 ए को हटाकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार ने एक ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की है। इन अनुच्छेदों की आड़ में एक तरफ जहां पाक परस्त नेता कश्मीर में अलगाववाद और उग्रवाद फैला रहे थे, वहीं दूसरी तरफ  ये अनुच्छेद जम्मू-कश्मीर और बाकी राष्ट्र के बीच एक दीवार का काम कर रहे थे। इन दोनों अनुच्छेदों को हटाने में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृहमंत्री अमित शाह एवं पूरी केंद्र सरकार ने जिस दृढ़ता और प्रतिबद्धता का परिचय दिया है, उसके लिए वह धन्यवाद के पात्र हैं। यह बात मंगलवार को ग्वालियर सांसद विवेक शेजवलकर ने भाजपा ग्वालियर ग्रामीण द्वारा आयोजित प्रेसवार्ता में पत्रकारों से चर्चा करते हुए कही।
शेजवलकर ने कहा कि कश्मीर के देश में विलय के बाद अस्थायी रूप से संविधान में जोड़ी गई 370 आगे चलकर कुछ राजनीतिक दलों और परिवारों के निजी स्वार्थों के चलते स्थायी जैसी बन गई थी। कश्मीरियों की बेहतरी के नाम पर संविधान में जोड़ी गई 370 अपने प्रावधानों के चलते कश्मीर में भेदभाव और सामाजिक अन्याय की प्रतीक बन गई थी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार ने इस प्रावधान को हटाकर न सिर्फ  सामाजिक न्याय का रास्ता प्रशस्त किया है, बल्कि कश्मीर और लद्दाख के विकास का रास्ता भी खोला है। केंद्र सरकार की इस पहल से देश के करोड़ों लोगों का ‘एक विधान, एक प्रधान और एक निशान’ का दशकों पुराना सपना साकार हुआ है।
कश्मीर के देश से एकीकरण, विकास में बाधा थी 370
 अनुच्छेद 35 ए के कारण जम्मू-कश्मीर के गैर निवासी नागरिकों को वो अधिकार नहीं मिल पाते थे, जो वहां के मूल निवासियों के पास होते थे। लेकिन अब इस अनुच्छेद के हट जाने के बाद हर नागरिक को एक जैसे अधिकार उपलब्ध होंगे।
 35 ए के अनुसार यदि कश्मीर का कोई पुरुष नागरिक गैर निवासी महिला से शादी करता था, तो उसके बच्चों को सभी अधिकार प्राप्त होते थे। लेकिन यदि कश्मीर की कोई महिला किसी गैर निवासी पुरुष से शादी करती थी, तो उसके बच्चों को न वहां की नागरिकता मिलती थी, न नौकरी मिलती थी और न ही संपत्ति में अधिकार मिलता था। इस अनच्छेद के हटने से अब सभी को एक जैसे अधिकार हासिल होंगे।
 इस अनुच्छेद के कारण कश्मीर में कई पीढिय़ों से निवास कर रहे श्रमिकों, अनुसूचित जाति तथा अनुसूचित जनजाति के लोगों के मौलिक अधिकारों का खुला उल्लंघन हो रहा था। 1960 के दशक में पंजाब से लाए गए वाल्मीकि समाज के लोगों को इस शर्त पर स्थायी निवास प्रमाण पत्र दिया गया था कि वे और उनकी आने वाली पीढिय़ां सिर्फ सफाई का ही काम करेंगी। अनुच्छेद के हटने के बाद अब इस तरह के अमानवीय भेदभाव की गुंजाइश खत्म हो गई है।
 इन अनुच्छेदों के कारण संपत्ति के स्वामित्व पर प्रतिबंध था, जिसके चलते कश्मीर से बाहर का कोई व्यापारी या उद्योगपति अपना उद्योग कश्मीर में नहीं लगाना चाहता था। लेकिन अब इन अनुच्छेदों की समाप्ति पर कोई भी व्यक्ति या जमीन या अन्य संपत्ति खरीद सकता है। इससे यहां औद्योगीकरण को बढ़ावा मिलेगा तथा बेरोजगारी जैसी समस्या दूर होगी।
 अनुच्छेद 370 के चलते कश्मीर में केंद्र सरकार के कई कानून और योजनाएं लागू नहीं हो पाती थीं। इसके चलते इन कानूनों या योजनाओं का लाभ यहां के निवासियों को नहीं मिल पाता था। शिक्षा का अधिकार, सूचना का अधिकार, मनी लांड्रिंग विरोधी कानून, कालाधन विरोधी कानून, भ्रष्टाचार विरोधी कानून, न्यूनतम वेतन का कानून आदि ऐसे ही कानून थे, जिनका लाभ कश्मीर की जनता को नहीं मिल पाता था। अब इन अनुच्छेदों की समाप्ति के बाद सभी कानून अन्य राज्यों की तरह जम्मू-कश्मीर में भी प्रभावी होंगे और वहां की जनता भी इनसे लाभान्वित होगी।
 कश्मीर में अल्पसंख्यकों के लिए आरक्षण का कोई प्रावधान नहीं था, लेकिन अब वहां के अल्पसंख्यकों को भी अन्य राज्यों की तरह आरक्षण का लाभ मिल सकेगा। अब दो केंद्र शासित प्रदेशों का निर्माण हुआ है लद्दाख की सदैव उपेक्षा हुई है जो भी राशि केंद्र से प्रदेश को दी जाती थी उसमें लद्दाख को अत्यंत कम दी गई।  लद्दाख को क्षेत्रफल के अनुसार विकास की राशि का आवंटन कभी नहीं किया गया। केंद्र शासित प्रदेश बनने से लद्दाख का विकास होगा और गृहमंत्री श्री अमित शाह ने आश्वासन दिया है कि जम्मू कश्मीर में जल्द ही चुनाव कराए जाएंगे।  
शेजवलकर ने कहा कि अनुच्छेद 370 और 35 ए को हटाकर केंद्र की मोदी सरकार ने कश्मीर में एक नई सुबह का आगाज किया है। उन्होंने कहा कि जनसंघ के जमाने में डॉ. श्यामाप्रसाद मुखर्जी ने एक देश में दो निशान, दो विधान और दो प्रधान का विरोध किया था और यह कहा था कि यह अन्यायपूर्ण है और जब भी हमें अवसर मिलेगा, हम इस प्रावधान को हटा देंगे। इसी के लिए उन्होंने अपने जीवन का बलिदान दिया। प्रधानमंत्री मोदी एवं गृहमंत्री  अमित शाह ने डॉ. मुखर्जी की इस इच्छा को यथार्थ में रूपांतरित किया, इसके लिए मैं उन्हें, जम्मू-कश्मीर एवं लद्दाख के नागरिकों तथा करोड़ों देशवासियों को बधाई देता हूं।
प्रेसवार्ता में ग्रामीण जिलाध्यक्ष वीरेंद्र जैन, संभागीय मीडिया प्रभारी पवन कुमार सेन, ग्रामीण जिला महामंत्रीगण दीपक माहौर, केशव बघेल, ओमप्रकाश शर्मा मौजूद थे। 

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