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Sandhyadesh

आज की खबर

निगम अपने परियोजना अधिकारी को तत्काल मूल विभाग में भेजें

18-Sep-19 241
Sandhyadesh


ग्वालियर। ग्वालियर महानगर की बदहाल सडक़ें , बिना योजनाओं के काम होने पर निगम में वर्षों से पदस्थ परियोजना अधिकारी शिशिर श्रीवास्तव को अपने मूल विभाग में भेजा जाये। उनके स्थान पर किसी अन्य तेज तर्रार को परियोजना अधिकारी बनाया जाये जिससे ग्वालियर महानगर का स्मार्ट सिटी बनाये जाने का सपना पूरा हो सके। 
ज्ञातव्य है कि निगम में परियोजना अधिकारी के नाम पर मूल विभाग पीएचई के सीवर सेल के शिशिर श्रीवास्तव जबसे निगम में पैर पडे हैं उसके बाद से पूरे निगम का बंटाढार हो गया है। वैसे शिशिर को सीवर प्रोजेक्ट में महारथ हासिल है, लेकिन चाहे स्वर्ण रेखा नदी के सीमेंटेड कराने का कार्य हो उसमें बहने वाली सीवर का काम हो सभी आज भी महानगर को मुंह चिढा रहे हैं। स्वर्ण रेखा नदी में आने वाले बरसात के पानी के बाद गंदगी का अंबार साल मेें कई बार लगता है । उसको निगम के डंपरों जेसीबी से साफ कराने के बाद भी उसका लंबा चौडा बिल सफाई के नाम पर बनाया जा रहा है। परियोजना अधिकारी ने आज तक ऐसी परियोजना नहीं बनाई जिससे स्वर्ण रेखा में गंदगी ना आ सके। हां परियोजना अधिकारी सिर्फ आने वाले अधिकारियों की जी हुजूरी करना अच्छी तरह से जानते हैं। इतना ही नहीं महानगर में सडक़ों की खुदाई उसके बाद फिर से सडक़ों को बनाना फिर टूटना कोई भी योजना सही ढंग से नहीं लागू हो पाई है। इतना ही नहीं महानगर में वर्षों पूर्व इन्हीं परियोजना अधिकारी ने बस स्टेंड बनवाये थे आज उन पर कब्जा हो चुका है। कुछ में बीडी सिगरेट पुडिया की दुकानें चल रहीं हैं। ऐसे में परियोजना अधिकारी सिर्फ और सिर्फ निगम में नाकारा साबित हुए हैं। इनके नाम सिर्फ जी हुजूरी के कोई खिताब नहीं है। इनकी एक भी ऐसी उपलब्धि नहीं है जिससे कहा जाये कि महानगर में बेहतर विकास हुआ है। चाहे यातायात व्यवस्था हो , या फिर विकास कोई भी सही ढंग से नहीं हुआ। यातायात विभाग के लिए भी इन परियोजना अधिकारी ने सिटी सेंटर एसपी आफिस से लेकर पूरे तीन किलोमीटर के क्षेत्र में तीन जगहों पर लाल बत्ती लगवा दी। जिसे बाद में हटाना पडा। इस प्रकार से इन परियोजना अधिकारी के रहते निगम को सिर्फ हर योजना में मुंह की ही खानी पडी है। निगम के अधिकारियों का बिना नाम बताये कहना है कि निगम शिशिर श्रीवास्तव को ना जाने क्यों ढो रहा है। इससे तो इन्हें तत्काल अपने मूुल विभाग में भेजा जाना चाहिये। ये ना तो सीवर का ही काम सही ढंग से करा पा रहे हैं ना महानगर की योजना ही बना पा रहे हैं। एक अधिकारी ने कहा कि इनसे अच्छी योजना तो मैं कई बार निगम को दे चुका हूं उसमें परियोजना अधिकारी हेर फेर कर अपने नाम पर उसे बता देते हैं। अब देखना है कि निगम का बंटाढार करने वाले परियोजना अधिकारी को निगम यूं ही झेलता रहेगा या फिर उन्हें अपने मूल विभाग पीएचई सीवर प्रोजेक्ट में भेजेगा इसका इंतजार रहेगा। 

2019-10-20aaj