BREAKING!
  • रोशनी टीम हॉफ मैराथन में शामिल होने रवाना
  • योगा खूबसूरत जीवन को जीने का रास्ता दिखाता है: शुभांगी भसीन
  • स्काउट गाइड के बेसिक प्रशिक्षण में हाइक आयोजित की गई
  • हत्या के आरोपी को भागने में मदद करने वाले भाई को पकड़ा
  • गौवंश को दफनाने वाले 06 बदमाशों को पुलिस ने पकडा
  • सिंधिया 21 अक्टूबर को ग्वालियर आऐंगे
  • आईटीएम में इबारत-11 की महफिल 20 को
  • 22 अक्‍टूबर को बैंकों में हड़ताल
  • हिंदुओं का नारीवाद
  • अतिक्रमण हटाने पहुंचे प्रशासन के सामने विधायक मुन्नालाल अडे

Sandhyadesh

आज की खबर

बिखरी भाजपा में विपक्ष की धार भी नहीं रही

14-Sep-19 478
Sandhyadesh

15 साल तक सत्ता की मलाई खाने के बाद सूबे में विपक्ष में लौटी भाजपा के कार्यकर्ताओं के पास आंदोलन में जुटने का समय नहीं है। लगता है उन्हें अभी भी सत्ता में होने का अहसास सा होता है। परंतु असल बात तो यह है कि वह विपक्ष में है।
यहां बता दें कि गत रोज प्रदेश भाजपा ने घंटानाद आंदोलन किया था। उसी के तहत ग्वालियर में भी शहर भाजपा ने इसे अमलीजामा पहनाया, लेकिन वह सिर्फ खानापूर्ति तक ही सीमित रहा। हालांकि ग्वालियर में आंदोलन की अगुवाई पूर्व मंत्री भूपेन्द्र सिंह ने की थी। परंतु उसके बाबजूद नेता कार्यकर्ता आंदोलन में नहीं जुटे। सबसे बड़ा दल होने का दंभ भरने वाली भाजपा ग्वालियर में बमुश्किल कुछ ही कार्यकर्ता जुटा पाई। जबकि कुछ ने आंदोलन से दूरी बना ली। वहीं कई अपनी व्यस्तताओं के कारण आंदोलन में शामिल नहीं हुये। ग्वालियर में आंदोलन में ना के बराबर ही कार्यकर्ता जुटे। आंदोलन भी भीड़ न होने के कारण आधे घंटे में सिमट गया। कार्यकर्ता इस बात से भी आहत थे कि जब पार्टी सूबे में सत्ता में थी तो उन्हें पूछा नहीं गया और अब विपक्ष में है तो फोन लगाकर आंदोलन में भाग लेने की नेता विनती कर रहे है। 
वैसे भी ग्वालियर में पार्टी का जो हाल है वह किसी से छिपा नहीं। खुद भाजपा जिला प्रमुख के माथे पर एक नेता का होने का तमगा लगा है। इस कारण अलग अलग गुटीय नेताओं के कार्यकर्ताओं ने भी आंदोलन से दूरी बनाकर रखी। एक वजह आंदोलन से कार्यकर्ताओं की दूरी इसलिए भी रही कि उन्हें सत्ता में रहने की आदत सी पड़ गई थी और आंदोलन में होने वाली मेहनत से वह बचना चाहते थे, क्योंकि 15 साल की मलाई उनके शरीर पर दिखाई देती है और वह इससे बचकर ही रहे कि इस भीषण गर्मी में एसी रूमों से बाहर निकलकर पसीना कौन बहाये। 
कुल मिलाकर भाजपाईयों को विपक्ष में रहने की आदत ही छूट गई है, इसलिए कांग्रेस सरकार बनने के 9 माह बाद कोई विपक्षी आंदोलन प्रदेश में 15 साल सत्ता में रहने वाली सबसे बड़ी पार्टी ने रखा और वह भी बिना कार्यकर्ताओं की भीड़ के खानापूर्ति तक ही सीमित रह गया। 
दरबारी लाल.....

2019-10-20aaj