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युवाओं के जीवन में आध्यात्मिकता के समावेश की आवश्यकता - बी. के. आदर्श दीदी

13-Jan-20 48
Sandhyadesh

ग्वालियर | प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय के माधवगंज लश्कर सेवाकेंद्र द्वारा राष्ट्रीय युवा दिवस के उपलक्ष्य में युवा भाई-बहिनों के लिए "सशक्त युवा सशक्त भारत" विषय पर एक कार्यक्रम का आयोजन किया गया| कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य युवाओं को उनकी सुषुप्त शक्तियों को जाग्रत कर अपने जीवन में आध्यात्मिकता के समावेश द्वारा स्वयं का एक श्रेष्ठ चरित्र व महान व्यक्तित्व गढ़ सशक्त भारत, विश्वसिरोमणि भारत के निर्माण में उच्च भूमिका कैसे निभाई जाए| कार्यक्रम का शुभारम्भ दीप प्रज्वलन के साथ हुआ| कार्यक्रम में मुख्य रूप से बी. के. आदर्श दीदी (सेवाकेंद्र संचालिका लश्कर ग्वालियर) बी. के. प्रह्लाद भाई, बी. के. डॉ. गुरुचरण भाई, बी. के. ज्योति दीदी, बी.के. पवन भाई आदि मौजूद रहे |
दीप प्रज्वलन के पश्चात बी. के. प्रहलाद भाई ने स्वामी विवेकानंद जी को नमन करते हुए सभी को राष्ट्रीय युवा दिवस की शुभकामनाएं दी | इसके बाद स्वामी विवेकानंद जी की विशेषताओं को बताते हुआ कहा कि हर युवा को उनके जीवन से प्रेरणा लेनी चाहिए और उसके अनुरूप सकारात्मक चिंतन के साथ अपने जीवन को उदाहरण स्वरुप बनाना चाहिए| इस अवसर पर उन्होंने महात्मा बुद्ध के इस कथन को दोहराया कि जीवन क्षणिक है इसलिए वह हमेशा के लिए नहीं रहेगा| लेकिन क्षण क्षणिक नहीं है वह सदैव के लिए इतिहास के पन्नों पर लिख दिया जायेगा| अत: उस क्षण में जीवन कैसे बिताया जाये कैसे प्रत्येक क्षण को श्रेष्ठ से श्रेष्ठ बनाकर, सही दिशा देकर उन्नति के शिखर पर पहुंचकर उसे हमेशा के लिए अमिट कर दिया जाये| उस दिशा में हमें बढ़ना होगा |
इसके साथ ही उन्होंने बताया कि एक सशक्त युवा को क्या करना चाहिए -
1. सशक्त युवा सदैव अच्छे संग में रहेगा एवं अच्छे साहित्य का अध्यन करेगा |
2. सशक्त युवा हमेशा व्यसनों से दूर रहेगा |
3. उसके अन्दर देश हित एवं विश्व कल्याण की भावना होगी|
4. वह सदैव नारियों का सम्मान करेगा |
5. वह एकाग्रता के साथ अपने लक्ष्य के प्रति अग्रसर रहेगा |
6. वह दूसरों की कमी कमजोरी को न देखते हुए सभी को आगे बढ़ाने की भावना अपने ह्रदय में रखेगा |
7. वह ईर्ष्या, घ्रणा, क्रोध, परचिन्तन एवं भय से मुक्त होगा |
8. वह प्रतिदिन स्व-चिंतन एवं स्व-उन्नति के लिए समय निकालेगा | 
 
सेवाकेंद्र संचालिका बी. के. आदर्श दीदी जी ने कहा कि किसी भी राष्ट्र के निर्माण का आधार युवा हैं| आज का युवा कल के विश्वगुरु भारत का आधार है| वे ही सफलता के बीज हैं| यदि सारे इतिहास के पन्ने पलट कर देख लिया जाये तो संसार में जो भी परिवर्तन की क्रांतियाँ हुई हैं, परिवर्तन हुए हैं वह युवाओं के द्वारा ही किये गये हैं| और पूरे विश्व में सर्वाधिक युवाशक्ति भारत देश में हैं| उन्होंने 'युवा' शब्द का अर्थ एवं उनकी शक्तियों को स्पष्ट करते हुए बताया कि युवा अर्थात 'ऊर्जा' | यदि ऊर्जा का प्रयोग सही दिशा अर्थात सकारात्मक दिशा में हो तो वह निश्चित ही प्रगति के रूप में प्रत्यक्ष होगी और यदि इसका प्रयोग नकारात्मक दिशा में किया जाये तो निश्चित ही यह पतन का कारण बनेगी| क्यों कि किसी भी राष्ट्र का निर्माण भौतिकता से नहीं हो सकता उसके लिए आवश्यकता है सशक्त सोच की| और सोच में विशालता आध्यात्मिकता से ही आती है और सशक्त राष्ट्र के निर्माण के लिए प्रत्येक युवा के जीवन में कहीं ना कहीं आध्यात्मिकता के समावेश की आवश्यकता है|
जैसा कि हम सभी देख रहे हैं आज सभी का मन बहुत कमजोर हो गया है जो जल्दी ही व्यसन और व्यर्थ की तरफ आकर्षित हो जाता है| अतः अब मन को सही दिशा देकर सशक्त बनाने की आवश्यकता है| उन्होंने बताया कि मन की प्रवृत्ति चंचल है यदि मन को सही दिशा में न लगाया जाये तो मन किसी भी व्यर्थ में उलझकर हमारे जीवन को अनेक प्रकार की समस्याओं में डाल सकता है |
उन्होंने कहा कि युवावस्था दोपहर के सूर्य के समान तेजोमय अवस्था है एवं ऊर्जा से भरपूर होती है अतः युवाओं को आवश्यकता है अपनी इस ऊर्जा को सकारात्मक दिशा देकर सशक्त युवा के रूप में खुद को स्थापित कर सशक्त वातावरण निर्मित करने की|                      
बी. के. डॉ. गुरचरण भाई ने सभी को संबोधित करते हुए बताया कि आज वर्तमान समय आवश्यकता है परमात्मा की याद से आत्मा रुपी बैटरी को चार्ज कर अपने दिमाग को शीतल-शांत बनाकर जो हमारे अंदर शक्तियां सुषुप्त अवस्था में हैं उनको जाग्रत कर अपने अंदर की कमी-कमजोरी को समाप्त कर स्वयं को सही दिशा देने की| साथ ही जो संसार के अन्दर भटके हुए युवा हैं जो कि अनेक प्रकार के लडाई-झगडे में, काम बंद कलम बंद के नारों में आज अपनी शक्ति बर्बाद कर रहे हैं उन्हें जागरूक करने की और उन्हें इस युवा जीवन में ईश्वर प्रदत्त शक्तियों के महत्व से परिचित करवाने की तथा इस ऊर्जा को व्यर्थ में ना लगाते हुए सकारात्मक दिशा में उसका प्रयोग करें| और अपने से छोटों के लिए मार्गदर्शन देने के निमित्त बनें और अपने से बड़े हैं उनकी जो हमारे प्रति आस है तो उस आस को पूर्ण कर घर का दीपक बनने के साथ-साथ राष्ट्र और विश्व के भी दीपक बनें  |

कार्यक्रम के अंत में बी.के. ज्योति दीदी ने सभी को गहन राजयोग मैडिटेशन कि अनुभूति कराई | तत्पश्चात सभी को कुछ प्रतिज्ञाएँ भी करायीं गयीं|

2020-01-20aaj