ग्वालियर । मध्यप्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, जबलपुर के तत्वाधान में पूरे मध्यप्रदेश की जेलों में विषेश जेल लोक अदालत का आयोजन किया गया, जिसका वर्चुअल माध्यम से उद्घाटन मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधिपति व मध्यप्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के मुख्य संरक्षक न्यायमूर्ति श्री संजीव सचदेवा द्वारा केन्द्रीय जेल में किया गया।
मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधिपति व मध्यप्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के मुख्य संरक्षक न्यायमूर्ति श्री संजीव सचदेवा ने बताया कि बंदीगण की जेल में आने की जो भी परिस्थितियां रही हो, किंतु यहां से बाहर निकलने तक की समयावधि में बंदीगण को एक सकारात्मक व्यक्तित्व को अपनाने की दिशा में प्रयासरत रहना चाहिये, ताकि सजा अवधि पूर्ण करने के उपरांत बंदीगण समाज की मुख्यधारा में जुड सकें। जेल में मिलने वाली मूलभूत सुविधाओं के प्रति भी न्यायमूर्ति द्वारा उपस्थित बंदीगण को अवगत कराते हुये इस जेल लोक अदालत के माध्यम से लाभान्वित होने हेतु समझाईश दी गई। तत्पश्चात मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय खण्डपीठ-ग्वालियर के प्रशासनिक न्यायाधिपति न्यायमूर्ति श्री आनंद पाठक द्वारा उपस्थित बंदीगण को अवगत कराते हुये कहा कि पक्षकारगण को न्यायालय के समक्ष आना रहता है, जबकि इस कल्याणकारी जेल लोक अदालत के माध्यम से न्यायालय पक्षकार के पास आया है और लाभान्वित होने का एक मौका प्रदान कर रहा है। लोक अदालत का मूल उद्देश्य अपराध या विवाद को समाप्त करना नहीं है बल्कि अपराध या विवाद के कारणों को उजागर कर उसे समाप्त करने की दिषा में प्रयासरत होने का मौका देता है। साथ ही बताया कि हम सभी को यह प्रयास करना चाहिये कि वर्ष 2047 तक हम एक विवाद विहीन समाज की स्थापना कर सके और इस लक्ष्य प्राप्ति के लिये हमारे द्वारा दिया गया योगदान ही देश हितार्थ हमारा सद्कर्म होगा। यहां यह भी कहना आवश्यक है कि जिस ध्येय व उद्देश्य को आधार बनाकर मध्यप्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण जिस प्रकार कल्याणकारी योजनाओं को क्रियान्वित कर रहा है वह निश्चित ही एक विवाद विहीन समाज की स्थापना की नींव रख रहा है।
केन्द्रीय जेल, ग्वालियर में हुई जेल लोक अदालत में निराकरण हेतु कुल 60 प्रकरण चिन्हित किये गये और उनके निराकरण हेतु कुल 03 खण्डपीठों का गठन किया गया। लोक अदालत की प्रक्रिया अनुसार किये गये प्रयासों के फलस्वरूप 06 प्रकरण का प्ली-बारगेनिंग (अपराध स्वीकारोक्ति के आधार पर) तथा 12 आपराधिक प्रकृति के प्रकरणों में उभयपक्ष के मध्य आपसी सहमति के आधार पर समझौता हो जाने से कुल 18 प्रकरणों का निराकरण किया गया तथा इनमें से 7 बंदियों के रिहाई आदेश लोक अदालत खण्डपीठ के पीठासीन अधिकारी द्वारा जारी किये गये। जेल लोक अदालत में निराकृत उक्त प्रकरणों में से कुछ प्रकरणों के सफलता की कहानी निम्नानुसार है :-
1. वर्ष-2016 से लंबित एक मामले में शिकायतकर्ता स्वयं जेल परिसर में आये ताकि वे आरोपी के साथ आपसी सुलह एवं समझौता कर सकें। पीठासीन अधिकारी श्रीमती स्वाति शर्मा की खण्डपीठ क्रमांक 02 द्वारा इस समझौते को दर्ज किया और प्रक्रिया अनुसार आदेश पारित करते हुये आरोपी को तुरंत रिहा करने का आदेश जारी किया गया। इस प्रकार लगभग एक दशक से लंबित प्रकरण को मौके पर ही निराकृत कर जेल लोक अदालत की प्रभावशीलता को दर्शाया।
2. एक अन्य मामले में, जहां आरोपी और षिकायतकर्ता दोनो ही ग्वालियर के केन्द्रीय जेल में निरूद्ध थे, लोक अदालत के ध्येय अनुसार उभयपक्ष के मध्य समझौता वार्ता की सुविधा प्रदान की गई और उन्हें लोक अदालत खण्डपीठ द्वारा इस आयोजन के महत्व व निराकरण से लाभों को बताते हुये राजीनामा के लिये प्रोत्साहित किया, जिन प्रयासों के फलस्वरूप उभयपक्ष समझौता हेतु स्वेच्छा से सहमत हुये और प्रकरण का निराकरण लोक अदालत में किया जाकर आरोपी को आरोपो से बरी किया गया।
इस प्रकार के उदाहरण यह दर्शाते हैं कि लोक अदालत आयोजन की मूल धारणा कितनी सार्थक है, जिसकी प्रभावी क्रियाशीलता एक विवाद विहीन समाज की संकल्पना को साकार करने में महत्वपूर्ण भूमिका अदा करती है।
कार्यक्रम में न्यायमूर्ति श्री जी. एस. अहलूवालिया, न्यायमूर्ति श्री मिलिंद रमेश फडके, न्यायमूर्ति श्री आशीष श्रोती, न्यायमूर्ति श्री अमित सेठ, न्यायमूर्ति श्री आनंद सिंह बहरावत, न्यायमूर्ति श्री राजेश कुमार गुप्ता सहित मध्यप्रदेश जेल विभाग के विषेश महानिदेशक श्री अखेतो सेमा, मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय के रजिस्ट्रार जनरल श्री धरमिंदर सिंह, ग्वालियर के प्रधान जिला न्यायाधीश श्री ललित किशोर, जिला न्यायाधीश (निरीक्षण) श्री जाकिर हुसैन, मध्यप्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण की सदस्य सचिव सुश्री सुमन श्रीवास्तव, मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय खण्डपीठ-ग्वालियर के प्रिंसिपल रजिस्ट्रार श्री राजीव के पाल व रजिस्ट्रार श्री नवीन कुमार शर्मा, अतिरिक्त सचिव श्री अरविंद श्रीवास्तव, ग्वालियर कलेक्टर श्रीमती रूचिका चौहान व पुलिस अधीक्षक श्री धर्मवीर सिंह, केन्द्रीय जेल-ग्वालियर के जेल अधीक्षक श्री विदित सिरवैया एवं अन्य न्यायाधीशगण व जेल प्रशासन के अधिकारी सम्मिलित हुये।
विशेष जेल लोक अदालत के शुभारंभ अवसर पर कार्यक्रम के अंत में जेल में निरूद्ध बंदियों द्वारा तैयार किए गए स्मृति चिन्हों को जेल विभाग के अधिकारियों द्वारा भेंट किया गया।