जलभराव प्रभावित ग्रामों में हैंडपंप प्लेटफॉर्म ऊंचे करने का विशेष अभियान शुरू
ग्वालियर। बरसात के दौरान पेयजल स्रोतों को दूषित होने से बचाने और जलजनित बीमारियों की आशंका रोकने के लिए ग्वालियर जिले में जलभराव प्रभावित ग्रामों के हैंडपंपों के प्लेटफॉर्म ऊंचे किए जाएंगे। यह कार्य ग्राम पंचायतों के माध्यम से लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग की तकनीकी निगरानी में कराया जाएगा। कलेक्टर श्रीमती रुचिका चौहान ने इस कार्य को सर्वोच्च प्राथमिकता से अभियान के रूप में संचालित करने के निर्देश दिए हैं, ताकि ग्रामीण क्षेत्रों में सुरक्षित एवं स्वच्छ पेयजल उपलब्धता सुनिश्चित हो सके। इस क्रम में हैंडपंपों का सर्वे कर लिया गया है। साथ ही अभियान को मूर्तरूप देने के लिये सरपंच, सचिव व जीआरएस को प्रशिक्षण दिलाया गया है।
पिछले दो वर्षों में अत्यधिक वर्षा के दौरान कई ग्रामों में जलभराव की स्थिति बनी थी, जिससे नीचे बने हैंडपंप प्लेटफॉर्म डूबने की स्थिति निर्मित हुई और जल स्रोतों में दूषित पानी पहुंचने की आशंका बनी। इसी को दृष्टिगत रखते हुए कलेक्टर श्रीमती रुचिका चौहान द्वारा अभियान बतौर हैंडपंप के प्लेटफॉर्म ऊँचे करने के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही आवश्यकता अनुसार हैंडपंपों के पास सोख्ता गड्ढों का निर्माण कराने और जल निकासी की व्यवस्था बेहतर करने के निर्देश भी कलेक्टर द्वारा दिए गए हैं। जिला प्रशासन द्वारा लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के माध्यम से कराए गए सर्वे में 34 ग्रामों के 390 हैंडपंप जलभराव प्रभावित पाए गए हैं। सर्वे के आधार पर जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री सोजान सिंह रावत द्वारा प्रथम चरण में 29 ग्राम पंचायतों के 100 हैंडपंपों के प्लेटफॉर्म ऊंचे करने के निर्देश जारी किए गए हैं।
अभियान के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए 23 अप्रैल को जिला पंचायत सभागार में संबंधित ग्राम पंचायतों के सरपंच, सचिव एवं जीआरएस को तकनीकी प्रशिक्षण प्रदान किया गया। मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत सोजान सिंह रावत की उपस्थिति में आयोजित हुए प्रशिक्षण में प्लेटफॉर्म ऊंचाई, गुणवत्ता और सोख्ता गड्ढों के निर्माण संबंधी तकनीकी मार्गदर्शन दिया गया। साथ ही संबंधित ग्राम पंचायतों को कार्यों की प्रशासकीय स्वीकृति भी उपलब्ध कराई गई। प्रथम चरण में चिन्हित 100 हैंडपंपों पर कार्य पूर्ण होने के बाद शेष जलभराव प्रभावित हैंडपंपों पर भी वर्षा पूर्व कार्य कराया जाएगा। यह अभियान ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल स्रोतों की सुरक्षा, जल गुणवत्ता संरक्षण और जनस्वास्थ्य की दृष्टि से महत्वपूर्ण पहल साबित होगा।