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सफलता की कहानी: बहु-दिव्यांगता प्रमाण पत्र मिला तो अनूप के चेहरे पर लौटी मुस्कान

(हितेन्द्र सिंह भदौरिया)
ग्वालियर।  लंबे समय से अपनी परेशानियों के बीच जीवन जी रहे अनूप कुशवाह के लिए बुधवार का दिन नई उम्मीद लेकर आया। जिला दिव्यांग पुनर्वास केन्द्र ने अनूप को सहारा दिया है। 
विनयनगर निवासी अनूप कुशवाह सेरेब्रल पाल्सी से पहले से जूझ रहे थे। इसका दिव्यांगता प्रमाण-पत्र ही उनके पास था। मगर उन्हें आंखों से कम दिखाई देने की समस्या भी आ गई। नेत्र परीक्षण में दिव्यांगता पाई गई, तब उन्हें बहु-दिव्यांगता प्रमाण पत्र की जरूरत पड़ी। बहु दिव्यांगता प्रमाण-पत्र होने पर वे सरकार द्वारा दिव्यांगजनों के कल्याण के लिये संचालित विभिन्न योजनाओं का लाभ पाने के हकदार बन जाते। 
विभिन्न प्रकार की दिव्यांगताओं से जूझ रहे अनूप की परेशानी की बात जब कलेक्टर श्रीमती रुचिका चौहान के संज्ञान में आई तो उन्होंने संयुक्त संचालक सामाजिक न्याय एवं दिव्यांग सशक्तिकरण श्री विनोद सिंह को अनूप की मदद करने के निर्देश दिए। अनूप के साथ संयुक्त संचालक श्री सिंह जेएएच परिसर स्थित जिला दिव्यांग पुनर्वास केन्द्र पहुँचे। उन्होंने दिव्यांग बोर्ड में शामिल चिकित्सकों से चर्चा कर अनूप की बहु दिव्यांगता के बारे में बताया। परीक्षण में अनूप पात्र पाए गए और देखते ही देखते उनका बहु-दिव्यांगता प्रमाण पत्र बन गया। 
प्रमाण पत्र हाथ में आते ही अनूप के चेहरे पर खुशी छलक उठी। उनके चेहरे पर संतोष और आंखों में भविष्य की नई उम्मीद साफ नजर आई। अब उन्हें दिव्यांगजनों के लिए संचालित विभिन्न योजनाओं का लाभ मिल सकेगा, जिससे उनके जीवन को नई संबल मिलेगा।
अनूप कुशवाह ने इस सहयोग के लिए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और प्रदेश सरकार के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि सरकार ने दिव्यांग पुनर्वास केन्द्र खोलकर संवेदनशील पहल की है। इससे दिव्यांगजनों को त्वरित सहयोग और राहत मिल रही है। उनका कहना था कि यह प्रमाण पत्र केवल एक दस्तावेज नहीं, बल्कि उनके लिए सम्मान, सुविधा और बेहतर भविष्य का आधार है। जिला दिव्यांग पुनर्वास केन्द्र हम जैसे अन्य दिव्यांगजनों के लिए उम्मीद का केंद्र बन गया है। 

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