आईटीएम में ऋतु रंग पर हुए कई कार्यक्रम

ग्वालियर । प्रकृति में खिलती नई बौरे, कजरी चेती होरी से गुंजायमान वातावरण, मनमोहक नृत्य, चित्र और काव्य पाठ, कुछ ऐसा ही खूबसूरत संगम दिखा बसंत व होली के उपलक्ष्य में आयोजित हुए आईटीएम के ऋतु रंग कार्यक्रम का। ़ऋतुओं के आगमन को अब पर्व के रूप् मे मनाने की परंपरा शुरू कर चुके आईटीएम ने यह कार्यक्रम प्रकृति के सानिध्य का ख्याल रखते हुए सिथौली कैम्पस की नीम वीथिका में आयोजित किया। कार्यक्रम की शुरूआत आईटीएम ग्लोबल स्कूल के स्टूडेंट्स के सामूहिक नृत्य व शोभा यात्रा से की गई। पारंपरिक परिधानों में सजे स्टूडेट्स ने होरी खेलत हैं गिरधारी से की। सामूहिक नृत्य के साथ शोभा यात्रा मुख्य मंच पर जाकर पूर्ण हुई। इसके बाद प्रसिद्ध शास्त्रीय संगीत गायिका डॉ रीता देव ने उपशास्त्रीय गान की खूबसूतर प्रस्तुति दी। उन्होंने राग बसंत से शुरूआत कर सरस सुगंध नई वन वेली गाया। होरी गाने का कैसी धूम मचाई कन्हैया, उड़त अबीर गुलाल लाली छाई है, चढ़ल चैत चित लागे सुनाई। युवआों की पसंद का ख्याल रखते हुए उन्होंने चलो गुइयां आज खेले होली कन्हैया घर गाया। उनके साथ तबले पर अभिषेक मिश्रा ने और हारमोनियम पर विवेक ने संगत की। इसके अलावा परिसर में प्रसिद्ध 12 चित्रकारों ने भी अपने बनाए कुछ चित्रों को पूर्ण किया। इन चित्रकारों में आलोक शर्मा, अनुभूति जैन, अनूप षिवहरे, अरिहंत जैन, उमेंद्र वर्मा, बलवंत सिंह, लीना खरे,मनीष चंदेरिया, वीरेंद्र जैन,सोमेश सोनी, नरेंद्र जाटव और सुरेष ने अपनी कला का प्रदर्षन किया। आयोजन के दौरान शहर के कला साहित्य व संगीत प्रेमियों सहित अन्य प्रबुद्धजन और युवा उपस्थित रहे। शिंजनी ने दी कथक की नयनाभिराम प्रस्तुति पं. बिरजू महाराज की नातिन और प्रख्यात नृत्यांगना शिंजनी कुलकर्णी ने इस कार्यक्रम में मनमोहक कथक प्रस्तुति आकर्षण का केंद्र रही। शुरूआत उन्होंने ’देखो री खैवैया कैसे बन बन आए’ पर कथक की नयनाभिराम प्रस्तुति दी। फिर लखनउ घराने के कथक की भावपूर्ण प्रस्तुति दी। तीन ताल में बिलंवित प्रस्तुत किया। उन्होंने इसके अंदर से कलाई के खूसबरूत आंदाज, नजरों के ठहराव जैसी भावभंगिमाओं से मंत्रमुग्ध कर दिया। साथ-साथ उन्होंने अनामय भी प्रस्तुत किया। अपनी कदमतालों से उन्होंने पुल से गुजरती, रफतार धीमी और तेज चलती रेलगाड़ी की आवाज का अद्भुत अनुभव करवाया। कथक की एक प्रस्तुति में उन्होंने गेंद खेलते दो सखाओं का दृश्य और घुड़सवारी करते घुड़सवार व घोड़े की टाप को भी दिखाया।

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